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CJI बी.आर. गवई का कार्यकाल समाप्त, जस्टिस सूर्यकांत संभालेंगे न्यायपालिका की बागडोर

देश की न्यायपालिका के लिए यह सप्ताह बेहद महत्वपूर्ण है। मुख्य न्यायाधीश जस्टिस बी.आर. गवई रविवार को सेवानिवृत्त हो रहे हैं। शुक्रवार को उन्होंने सुप्रीम कोर्ट में अपने अंतिम कार्य दिवस पर भावुक संबोधन दिया और अपनी चार दशक लंबी न्यायिक यात्रा को संतोषजनक बताया। उन्होंने कहा कि वह स्वयं को हमेशा न्याय का विद्यार्थी समझते रहे और इसी भावना के साथ इस सम्मानित संस्था से विदा ले रहे हैं।

जस्टिस गवई ने अदालत कक्ष से अंतिम बार बाहर निकलने से पहले कहा कि उन्हें इस बात का संतोष है कि उन्होंने देश के लिए अपनी पूरी क्षमता के अनुसार योगदान दिया। वकील से लेकर उच्च न्यायालय के जज, सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीश और फिर देश के मुख्य न्यायाधीश बनने तक उनका सफर उल्लेखनीय रहा।

अब उनकी जगह जस्टिस सूर्यकांत देश के 53वें मुख्य न्यायाधीश के रूप में जिम्मेदारी संभालने जा रहे हैं। वे सोमवार को राष्ट्रपति भवन में शपथ लेंगे। इस शपथ ग्रहण समारोह में भूटान, नेपाल, श्रीलंका, केन्या, मलेशिया, मॉरीशस और ब्राजील सहित कई देशों के मुख्य न्यायाधीश मौजूद रहेंगे। यह अवसर भारतीय न्यायपालिका के लिए ऐतिहासिक माना जा रहा है।

हरियाणा के हिसार में 10 फरवरी 1962 को जन्मे जस्टिस सूर्यकांत एक साधारण मध्यमवर्गीय परिवार से आते हैं। 1981 में उन्होंने हिसार के गवर्नमेंट पीजी कॉलेज से स्नातक और 1984 में महर्षि दयानंद विश्वविद्यालय, रोहतक से एलएलबी की डिग्री हासिल की। वकालत की शुरुआत हिसार जिला अदालत से हुई और मेहनत के बल पर वे लगातार आगे बढ़ते गए।

साल 2000 में उन्हें हरियाणा का महाधिवक्ता नियुक्त किया गया। 2018 में वे हिमाचल प्रदेश हाई कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश बने और मई 2019 में सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीश के रूप में पदोन्नत हुए। शांत, संयमित और संवेदनशील स्वभाव के लिए जाने जाने वाले जस्टिस सूर्यकांत ने सामाजिक न्याय, सार्वजनिक संसाधनों की सुरक्षा, भूमि अधिग्रहण, मुआवजे और संवैधानिक संतुलन जैसे मुद्दों पर कई अहम फैसले दिए हैं।

मुख्य न्यायाधीश के रूप में उनका फोकस अदालतों में लंबित मामलों की संख्या को कम करने पर रहेगा। वह पहले भी न्याय व्यवस्था को अधिक प्रभावी और तेज बनाने की दिशा में कई पहल कर चुके हैं। उनके नेतृत्व में न्यायपालिका के नए अध्याय की शुरुआत होने जा रही है, जिससे न्याय प्रणाली में सुधार और संवेदनशीलता की नई अपेक्षाएँ जुड़ गई हैं।