सरकार कस्टम ड्यूटी स्ट्रक्चर को सरल बनाने की तैयारी में है। सूत्रों के अनुसार, मौजूदा आठ स्लैब को घटाकर पांच या छह करने पर विचार किया जा रहा है। इसका उद्देश्य आयात शुल्क को राष्ट्रीय औद्योगिक और व्यापारिक प्राथमिकताओं के अनुरूप बनाना और सीमा शुल्क विवादों को कम करना है। केंद्र सरकार पिछले दो वर्षों से सीमाशुल्क ढांचे में सुधार पर ध्यान दे रही है। इस कदम से उलटी शुल्क संरचनाओं को ठीक करना, विवेकाधीन छूटों को कम करना और टैरिफ विवादों को घटाना आसान होगा। वित्त मंत्रालय और सीबीडी बोर्ड रिवाइज्ड जीएसटी के साथ सुसंगत और पारदर्शी सीमा शुल्क प्रणाली बनाने में जुटे हैं।
सरकार का फोकस विशेष रूप से एसईजेड और डॉमेस्टिक टैरिफ एरिया के बीच टैरिफ संरचना को स्पष्ट करने पर है। वित्तीय संसदीय स्थायी समिति की रिपोर्ट के अनुसार, दिसंबर 2024 तक 75,592 सीमा शुल्क मामले लंबित थे, जिन पर 24,016 करोड़ रुपए वसूली योग्य थे। विशेषज्ञों का मानना है कि नए स्लैब और सरलीकरण से विदेशी सामान की कीमतों में कमी आ सकती है और व्यवसायों पर मुकदमेबाजी का बोझ कम होगा। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने संकेत दिया है कि सीमाशुल्क सुधार सरकार के अगला प्रमुख सुधार एजेंडे का हिस्सा होगा।









