BJP ने चंद्रपुरम पोन्नुसामी राधाकृष्णन को उपराष्ट्रपति पद का उम्मीदवार बनाया, विपक्ष की बढ़ी मुश्किलें

नई दिल्ली। केंद्र में सत्तारूढ़ भाजपा के नेतृत्व वाले राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) ने महाराष्ट्र के राज्यपाल और तमिलनाडु से आने वाले वरिष्ठ भाजपा नेता चंद्रपुरम पोन्नुसामी राधाकृष्णन (CPR) को उपराष्ट्रपति पद का उम्मीदवार घोषित कर दिया है। आरएसएस की पृष्ठभूमि वाले राधाकृष्णन राज्य के प्रभावशाली ओबीसी समुदाय से संबंध रखते हैं। भाजपा अध्यक्ष जे.पी. नड्डा ने पार्टी संसदीय बोर्ड और सहयोगी दलों के साथ विचार-विमर्श के बाद उनके नाम का ऐलान किया।

NDA के इस कदम से विपक्षी दलों, खासकर तमिलनाडु की सत्ताधारी पार्टी डीएमके और इंडिया अलायंस की मुश्किलें बढ़ गई हैं। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि राधाकृष्णन को उम्मीदवार बनाकर भाजपा ने विपक्ष को ‘डबल टेंशन’ दी है—पहली, क्योंकि वह ओबीसी समुदाय से आते हैं, जो डीएमके का पारंपरिक वोट बैंक माना जाता है; और दूसरी, वह तमिलनाडु के ‘क्षेत्रीय गौरव’ का प्रतिनिधित्व करते हैं।

राजनीतिक हलकों में चर्चा है कि अगर डीएमके उनका विरोध करती है, तो यह ओबीसी हितों के खिलाफ माना जा सकता है। वहीं, भाजपा इस चुनाव को तमिलनाडु के गौरव के रूप में प्रचारित करने की तैयारी में है। इस मुद्दे को डीएमके की प्रतिद्वंद्वी एआईएडीएमके भी भुनाने की कोशिश कर सकती है। एआईएडीएमके नेता और विधानसभा में विपक्ष के नेता पलानीस्वामी ने कहा कि “सीपीआर को उनकी सार्वजनिक सेवा और समर्पण के लिए सम्मानित किया गया है।”

विपक्षी दल सोमवार को बैठक कर आगामी 9 सितंबर को होने वाले उपराष्ट्रपति चुनाव की रणनीति तय करेंगे। हालांकि, इतिहास गवाह है कि राष्ट्रपति और उपराष्ट्रपति चुनावों में कई बार क्षेत्रीय भावनाओं और सामाजिक समीकरणों के चलते विपक्षी दलों ने भी क्रॉस वोटिंग कर सत्ता पक्ष के उम्मीदवार का समर्थन किया है।

प्रणब मुखर्जी, प्रतिभा पाटिल, ज्ञानी जैल सिंह और एपीजे अब्दुल कलाम के मामलों में पहले भी ऐसा देखने को मिला है, जब विरोधी दलों ने भी क्षेत्रीय या सामाजिक पहचान के आधार पर समर्थन दिया। ऐसे में राजनीतिक पर्यवेक्षकों का मानना है कि राधाकृष्णन के मामले में भी विपक्षी एकजुटता की परीक्षा होगी और क्रॉस वोटिंग की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता।

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