बिहार सरकार भिक्षावृत्ति खत्म करने और जरूरतमंदों को समाज की मुख्यधारा से जोड़ने के लिए लगातार बड़े कदम उठा रही है। मुख्यमंत्री भिक्षावृत्ति निवारण योजना के तहत सड़क किनारे भीख मांगकर जीवन यापन करने वाले लोगों को चिन्हित कर समूहों में संगठित किया जा रहा है और उनके बैंक खातों में 10-10 हजार रुपये की सहायता राशि दी जा रही है, ताकि वे छोटा रोजगार शुरू कर आत्मनिर्भर बन सकें। यह योजना फिलहाल राज्य के 10 जिलों—पटना, गया, नालंदा, मुजफ्फरपुर, दरभंगा, पूर्णिया, सहरसा, भागलपुर, मुंगेर और सारण में संचालित की जा रही है, जहां समाज कल्याण विभाग द्वारा 19 पुनर्वास केंद्र चलाए जा रहे हैं।
इन केंद्रों में भिक्षुकों को भोजन, कपड़ा, इलाज, काउंसलिंग, योग और मनोरंजन जैसी सुविधाएं मुफ्त दी जा रही हैं। इसके अलावा 14 अन्य जिलों में नए पुनर्वास गृह खोलने की प्रक्रिया चल रही है और भोजपुर जिले में दो हाफ-वे होम बनाए जा रहे हैं। वर्तमान में पूर्णिया में 10 समूह सफलतापूर्वक काम कर रहे हैं, जिनमें शामिल लोग चाय दुकान, अंडा दुकान और सब्जी बेचकर आजीविका चला रहे हैं। सरकार की इस पहल को भिक्षावृत्ति उन्मूलन और सामाजिक पुनर्वास की दिशा में एक अहम कदम माना जा रहा है, जिससे न केवल जरूरतमंदों को सम्मानजनक जीवन मिलेगा, बल्कि समाज में स्थायी बदलाव भी संभव हो सकेगा।









