असम की राजनीति में उस समय हलचल मच गई जब पूर्व एपीसीसी अध्यक्ष भूपेन कुमार बोराह ने कांग्रेस पार्टी से इस्तीफा देने की घोषणा कर दी। उनके इस कदम के बाद राज्य में सियासी चर्चाओं का दौर तेज हो गया है। हालांकि कुछ स्थानीय नेताओं ने दावा किया कि उन्होंने राहुल गांधी से बातचीत के बाद अपने निर्णय पर पुनर्विचार किया, लेकिन ताजा घटनाक्रम संकेत दे रहे हैं कि बोराह ने पार्टी से दूरी बना ली है और निकट भविष्य में भाजपा में शामिल हो सकते हैं।
बोराह ने कहा कि उन्होंने कांग्रेस को 32 साल दिए, लेकिन कई मौकों पर उनका सार्वजनिक रूप से अपमान हुआ। उन्होंने आरोप लगाया कि गौरव गोगोई के साथ मतभेद लंबे समय से चल रहे थे और इस बारे में उन्होंने राहुल गांधी को भी अवगत कराया, पर कोई कार्रवाई नहीं हुई। बोराह के अनुसार, गठबंधन और टिकट वितरण के मुद्दों पर उन्हें नजरअंदाज किया गया।
वहीं गौरव गोगोई ने पलटवार करते हुए कहा कि बोराह भाजपा में जाने के लिए बहाने बना रहे हैं। उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि भाजपा में शामिल होने वालों को एक तय स्क्रिप्ट दी जाती है। गोगोई ने सवाल उठाया कि अगर कांग्रेस से असंतोष था तो उन्होंने किसी अन्य विपक्षी दल का रुख क्यों नहीं किया। विधानसभा चुनाव से पहले यह घटनाक्रम असम की राजनीति को नया मोड़ दे सकता है।









