मार्च 2026 में मध्य पूर्व में ईरान, सऊदी अरब और कतर की प्रमुख ऊर्जा सुविधाओं पर मिसाइल और ड्रोन हमले हुए, जिससे वैश्विक तेल और गैस आपूर्ति बाधित हुई। रीयूटर्स और Argus Media की रिपोर्ट के अनुसार रास तनूरा और रास लफ्फान जैसे महत्वपूर्ण तेल और गैस हब निशाने पर रहे, जिससे ब्रेंट क्रूड की कीमतें 112 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर चली गईं और क्षेत्र में तनाव चरम पर पहुंच गया।
सरकार ने इन हमलों के प्रभाव पर भी टिप्पणी की, जिसमें कतर की दुनिया की सबसे बड़ी एलएनजी उत्पादन सुविधा पर ईरान का हमला शामिल है। सरकार ने कहा, “अगर हम एलपीजी की बात करें तो हमारे आयात का 90% मध्य पूर्व से होता है। एलएनजी की बात करें तो हमारे आयात का 47% कतर से आता है। मध्य पूर्व पर जो असर पड़ता है, उसका असर हम पर भी पड़ता है।” इस घटना ने वैश्विक ऊर्जा बाजार में अनिश्चितता बढ़ा दी है और भारत जैसी आयातक अर्थव्यवस्थाओं के लिए आपूर्ति सुरक्षा को भी चुनौती दी है।









