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आंवला बीज रिसर्च से 70 हजार किसानों को नई आय, हर्बल सेक्टर को वैश्विक पहचान

आंवला के बीज, जिन्हें कभी बेकार समझकर फेंक दिया जाता था, अब आयुर्वेदिक शोध और ग्रामीण अर्थव्यवस्था के केंद्र में आ गए हैं। Patanjali Research Institute ने आचार्य Acharya Balkrishna के मार्गदर्शन में आंवला बीज पर वैज्ञानिक अध्ययन कर इसे उच्च पोषक तत्वों से भरपूर बताया है। रिसर्च में पाया गया कि बीज में एंटीऑक्सीडेंट्स, ओमेगा फैटी एसिड, लिनोलिक एसिड, क्वेरसेटिन, कैटेचिन और फ्लेवोनॉयड्स जैसे तत्व प्रचुर मात्रा में मौजूद हैं, जो हृदय, त्वचा, बाल, इम्यूनिटी और मानसिक स्वास्थ्य के लिए लाभकारी हो सकते हैं।

इन निष्कर्षों के आधार पर पतंजलि ने कई आयुर्वेदिक उत्पाद विकसित किए हैं, जिनमें हृदय स्वास्थ्य कैप्सूल, फाइटोन्यूट्रिएंट ऑयल, हर्बल टैबलेट्स और डायबिटीज मैनेजमेंट सप्लीमेंट्स शामिल हैं। आयुष मंत्रालय, CSIR और अंतरराष्ट्रीय वैज्ञानिक संस्थाओं ने भी इस शोध को मान्यता दी है। वर्ष 2024 में आंवला सीड एक्सट्रैक्ट फॉर्मूलेशन पर कई पेटेंट फाइल किए गए, जिससे हर्बल इनोवेशन में भारत की वैश्विक पहचान मजबूत हुई।

इस पहल का बड़ा असर ग्रामीण अर्थव्यवस्था पर भी पड़ा है। पतंजलि द्वारा बीज खरीद कार्यक्रम शुरू किए जाने से 70,000 से अधिक किसानों को अतिरिक्त आय का स्रोत मिला है। इससे ‘जीरो-वेस्ट’ हर्बल खेती और सर्कुलर इकॉनमी मॉडल को बढ़ावा मिला है, जहां फल का हर हिस्सा उपयोग में लाया जा रहा है। आंवला बीज से बने उत्पाद अब अमेरिका, यूरोप और दक्षिण-पूर्व एशिया तक निर्यात किए जा रहे हैं, जिससे भारत के हर्बल व्यापार को नई दिशा मिली है।