Uttar Pradesh

अखिलेश यादव ने दिवाली समारोह की तुलना क्रिसमस से की, बोले— दीपकों पर फिजूल खर्च क्यों?

समाजवादी पार्टी के प्रमुख अखिलेश यादव ने दिवाली पर किए जा रहे सरकारी खर्च को लेकर तीखी टिप्पणी की है। उन्होंने कहा कि दीपकों और मोमबत्तियों पर इतना पैसा खर्च करने की जरूरत नहीं है, बल्कि हमें दुनिया भर में मनाए जाने वाले क्रिसमस जैसे त्योहारों से सीख लेनी चाहिए। उनके इस बयान के बाद राजनीतिक विवाद खड़ा हो गया है।

🔹 क्या कहा अखिलेश यादव ने?

एक सभा को संबोधित करते हुए अखिलेश यादव ने कहा—

“मैं भगवान राम के नाम पर एक सुझाव देना चाहूंगा। दुनिया भर में क्रिसमस के दौरान सभी शहर जगमगा उठते हैं और यह महीनों तक चलता है। हमें उनसे सीखना चाहिए। हमें दीपकों और मोमबत्तियों पर पैसा क्यों खर्च करना चाहिए और इसके लिए इतना सोचना क्यों चाहिए?”

उन्होंने आगे कहा—

“इस सरकार से अब क्या उम्मीद की जा सकती है? इसे बदल देना चाहिए। हम सुनिश्चित करेंगे कि यहां और भी खूबसूरत रोशनियां हों।”

🔹 अयोध्या में तैयारियां जोरों पर

अखिलेश का यह बयान ऐसे समय में आया है जब अयोध्या में 26 लाख से अधिक दीपक जलाने की तैयारी चल रही है। अधिकारियों के मुताबिक, राम की पौड़ी और 56 घाटों पर 26,11,101 दीपक जलाए जाएंगे, जिससे एक नया विश्व रिकॉर्ड बनने की उम्मीद है।

🔹 भाजपा का पलटवार

अखिलेश यादव के बयान पर भाजपा ने तीखी प्रतिक्रिया दी है। पार्टी के राष्ट्रीय प्रवक्ता शहजाद पूनावाला ने कहा—

“जब अयोध्या जगमगा रही है, तब अखिलेश यादव को समस्या हो रही है। समाजवादी पार्टी के शासन में अयोध्या अंधेरे में थी।”

🔹 विहिप ने भी साधा निशाना

विश्व हिंदू परिषद (VHP) के राष्ट्रीय प्रवक्ता विनोद बंसल ने भी अखिलेश की आलोचना की। उन्होंने कहा—

“उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री ने दिवाली के अवसर पर क्रिसमस की तारीफ की। ईसाई धर्म के अस्तित्व में आने से पहले भी भारत में दिवाली मनाई जाती थी। अखिलेश यादव भारतीय संस्कृति की बजाय विदेशी परंपराओं का महिमामंडन कर रहे हैं।”

बंसल ने आगे कहा—

“अखिलेश यादव हिंदुओं की खुशी से ईर्ष्या करते हैं। उनकी सनातन विरोधी मानसिकता ही उन्हें ऐसे बयान देने को प्रेरित करती है। शायद इसीलिए लोग उनकी पार्टी को समाजवादी नहीं, ‘असमाजवादी पार्टी’ कहते हैं।”

🔹 लगातार बढ़ रहा विवाद

अखिलेश यादव के इस बयान को लेकर सियासी हलकों में हलचल मची हुई है। जहां विपक्ष इसे धार्मिक भावनाओं से खिलवाड़ बता रहा है, वहीं समाजवादी पार्टी का कहना है कि अखिलेश का मकसद सिर्फ सरकारी फिजूलखर्ची पर सवाल उठाना था।