सरकारी रिकॉर्ड को अधिक सुरक्षित और भरोसेमंद बनाने की दिशा में देश में डिजिटल पहचान व्यवस्था को मजबूत करने की तैयारी चल रही है। इसी कड़ी में उत्तर प्रदेश सरकार ने जन्म और मृत्यु से जुड़े दस्तावेजों की प्रक्रिया में बड़ा बदलाव प्रस्तावित किया है। नए प्रस्ताव के अनुसार, जन्म प्रमाण पत्र बनवाने के दौरान माता-पिता की पहचान के तौर पर आधार विवरण देना जरूरी होगा, जबकि मृत्यु पंजीकरण में संबंधित व्यक्ति के आधार नंबर का सत्यापन किया जाएगा। इस पहल का मुख्य उद्देश्य दस्तावेजों में होने वाली गड़बड़ियों और फर्जी रिकॉर्ड के मामलों को कम करना है।
प्रशासन का मानना है कि आधार आधारित सत्यापन से प्रमाण पत्र जारी करने की प्रक्रिया अधिक पारदर्शी और तेज हो सकेगी। इसके लिए जन्म और मृत्यु पंजीकरण प्रणाली को केंद्रीय रिकॉर्ड सिस्टम से जोड़ने की योजना बनाई गई है। इससे सरकारी योजनाओं का लाभ सही लाभार्थियों तक पहुंचाने में भी मदद मिलेगी। साथ ही ऑनलाइन सत्यापन प्रक्रिया से नागरिकों को बार-बार दफ्तरों के चक्कर नहीं लगाने पड़ेंगे।
नई व्यवस्था के तहत अस्पतालों और स्थानीय निकायों को भी डिजिटल रिपोर्टिंग प्रक्रिया अपनाने के निर्देश दिए जाएंगे। सरकारी अस्पतालों में नवजात के जन्म से पहले ही जरूरी रिकॉर्ड तैयार करने की व्यवस्था बनाई जा रही है, जबकि निजी अस्पतालों को भी ऑनलाइन सूचना साझा करने के लिए कहा जाएगा। इससे समय की बचत होगी और प्रशासनिक कार्यों में सुधार आएगा।
सरकार का मानना है कि इस बदलाव से रिकॉर्ड प्रबंधन अधिक व्यवस्थित होगा और भविष्य में दस्तावेजों से जुड़े विवादों को कम करने में मदद मिलेगी। यदि यह व्यवस्था सफल रहती है, तो इसे धीरे-धीरे अन्य राज्यों में भी लागू किया जा सकता है।









