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आधार बन गया दुनिया की सबसे बड़ी बायोमेट्रिक पहचान प्रणाली, सक्रिय यूजर्स 134 करोड़ के पार

भारत की आधार प्रणाली अब वैश्विक स्तर पर सबसे बड़ी बायोमेट्रिक पहचान प्रणाली के रूप में उभर चुकी है। सरकारी आंकड़ों के अनुसार, इस समय देश में लगभग 134 करोड़ लोग सक्रिय रूप से आधार का उपयोग कर रहे हैं। इसके जरिए अब तक 17,000 करोड़ से अधिक पहचान सत्यापन लेन-देन सफलतापूर्वक पूरे किए जा चुके हैं।

इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी राज्य मंत्री जितिन प्रसाद ने लोकसभा में बताया कि भारतीय विशिष्ट पहचान प्राधिकरण (यूआइडीएआइ) द्वारा संचालित आधार प्रणाली आज सरकारी और निजी दोनों क्षेत्रों में पहचान सत्यापन का मुख्य साधन बन गई है।

आधार में पहचान की पुष्टि कई तरीकों से की जाती है। इसमें ओटीपी (वन-टाइम पासवर्ड), फिंगरप्रिंट, आइरिस स्कैन, फेस पहचान और आधार में दर्ज जनसांख्यिकीय विवरण शामिल हैं। खासकर फेस पहचान प्रणाली में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और मशीन लर्निंग तकनीक का उपयोग किया जा रहा है, जिससे पहचान की सटीकता और विश्वसनीयता बढ़ी है।

बैंक, बीमा, मोबाइल और सरकारी योजनाओं जैसी सेवाओं के लिए संस्थाओं को आधार के माध्यम से सत्यापन करने के लिए एयूए (ऑथेंटिकेटिंग यूटिलिटी एजेंसी) या केयूए (केवाईसी यूटिलिटी एजेंसी) के रूप में पंजीकरण कराना आवश्यक होता है। इस पंजीकरण से ही वे आधार आधारित सेवाओं का उपयोग कर सकते हैं।

यूआइडीएआइ के आंकड़े यह दर्शाते हैं कि आधार ने डिजिटल पहचान और सेवा वितरण के क्षेत्र में एक क्रांति ला दी है। यह प्रणाली न केवल आसान और सुरक्षित पहचान सुनिश्चित करती है, बल्कि सरकारी योजनाओं और वित्तीय लेन-देन में पारदर्शिता भी बढ़ाती है।