भारत की रक्षा अनुसंधान एजेंसी, DRDO, अब भविष्य के युद्धों के लिए एक महत्वाकांक्षी रोडमैप तैयार कर रही है, जिसमें अगली पीढ़ी के हथियार और अत्याधुनिक तकनीक पर जोर है। अमेरिका-इजराइल-ईरान जैसी हाल की लड़ाइयों से सबक लेकर, भारत अब ऐसे सिस्टम विकसित करने पर केंद्रित है जो युद्ध के मैदान में गेम-चेंजर साबित हों।
इस योजना के तहत सुपर हाइपरसोनिक मिसाइलों, एडवांस बैलेस्टिक मिसाइलों और छठी पीढ़ी के लड़ाकू विमान (6th Gen fighter) का विकास प्राथमिकता में है। हाइपरसोनिक मिसाइलें Mach 5 से अधिक की रफ्तार से उड़ सकती हैं और इनमें दिशा बदलने की क्षमता होती है, जिससे इन्हें रोकना मुश्किल हो जाता है। इनके निर्माण के लिए स्क्रैमजेट इंजन, हाई-टेम्परेचर सामग्री और AI आधारित गाइडेंस सिस्टम जैसी अत्याधुनिक तकनीकों की आवश्यकता होती है।
DRDO ने यह भी स्पष्ट किया है कि इतने बड़े प्रोजेक्ट को केवल सरकारी संस्थानों तक सीमित नहीं रखा जा सकता। इसलिए प्राइवेट कंपनियों, स्टार्टअप्स और शैक्षणिक संस्थानों को भी इसमें शामिल किया जाएगा। एडवांस बैलेस्टिक मिसाइल प्रोग्राम में रेंज, सटीकता, survivability और दुश्मन के डिफेंस सिस्टम को भेदने की क्षमता पर जोर है। MIRV तकनीक, हाइपरसोनिक ग्लाइड व्हीकल और समुद्र से लॉन्च होने वाली मिसाइलों (SLBM) पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है, जिससे भारत की Second Strike Capability मजबूत होगी।
6th Generation फाइटर जेट्स में एडवांस स्टेल्थ, AI आधारित निर्णय प्रणाली, नए इंजन, लेजर हथियार और सेंसर फ्यूजन जैसी तकनीकें शामिल होंगी। खास रणनीति के तहत फाइटर जेट और ऑटोनॉमस ड्रोन (Loyal Wingman) एक साथ लड़ेंगे, जिससे पायलट की सुरक्षा बढ़ेगी और युद्ध में फोर्स मल्टीप्लायर का काम होगा।DRDO ने वैश्विक तकनीकी और युद्ध प्रवृत्तियों का अध्ययन करने के लिए एक विशेष कमेटी भी बनाई है, जो अगले 3-6 महीने में दिशा निर्देश और निवेश की प्राथमिकताएं तय करेगी। यह रोडमैप स्पष्ट करता है कि भारत अब पारंपरिक हथियारों से आगे बढ़कर हाई-टेक फ्यूचर वॉरफेयर की दिशा में तेजी से कदम बढ़ा रहा है।









