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PM मोदी की एक कॉल से कम हो सकता है तनाव: यूएई के राजदूत का बयान

ईरान, इजरायल और अमेरिका के बीच बढ़ते तनाव का असर अब खाड़ी देशों पर भी दिखाई देने लगा है। संयुक्त अरब अमीरात (UAE) भी इस स्थिति से प्रभावित हो रहा है। रिपोर्ट्स के अनुसार ईरान की ओर से यूएई के कुछ क्षेत्रों को निशाना बनाते हुए मिसाइल और ड्रोन हमले किए गए, जिससे वहां जनजीवन पर असर पड़ा है। हालांकि अभी यह कहना मुश्किल है कि यह संघर्ष कब तक जारी रहेगा।

इसी बीच भारत में संयुक्त अरब अमीरात के पहले राजदूत हुसैन हसन मिर्जा अलसयेघ ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को लेकर बड़ा बयान दिया है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी की एक फोन कॉल भी हालात को शांत करने में अहम भूमिका निभा सकती है।

राजदूत ने कहा कि यूएई का ईरान के साथ पड़ोसी होने के बावजूद इस संघर्ष में शामिल होने का कोई इरादा नहीं है। उन्होंने बताया कि यूएई के दोनों देशों के साथ अच्छे संबंध हैं और अब्राहम समझौते के तहत इजरायल के साथ उसकी साझेदारी भी बनी हुई है। यूएई सरकार पहले ही साफ कर चुकी है कि उसकी जमीन का इस्तेमाल किसी भी देश के खिलाफ हमले के लिए नहीं होने दिया जाएगा।

उन्होंने यूएई पर हुए मिसाइल और ड्रोन हमलों को चिंताजनक बताया, लेकिन साथ ही कहा कि देश की रक्षा प्रणाली कई संभावित हमलों को रोकने में सफल रही है। यूएई नेतृत्व ने स्पष्ट किया है कि यदि देश पर हमला होता है तो उसे आत्मरक्षा की कार्रवाई माना जाएगा।

राजदूत ने यह भी कहा कि इस संघर्ष का असर पूरे क्षेत्र की अर्थव्यवस्था और समुद्री व्यापार पर पड़ रहा है। कई बीमा कंपनियां जहाजों का बीमा करने से हिचक रही हैं, जिससे व्यापार प्रभावित हो सकता है। यदि तनाव लंबे समय तक जारी रहता है तो आने वाले समय में तेल की कीमतों में भी बड़ी बढ़ोतरी देखने को मिल सकती है।

उन्होंने यूएई में रह रहे लाखों भारतीयों को भरोसा दिलाया कि देश सुरक्षित है और भारतीय समुदाय वहां बेहद अहम भूमिका निभाता है। साथ ही उन्होंने उम्मीद जताई कि भारत और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की कूटनीतिक पहल क्षेत्र में शांति स्थापित करने में मददगार साबित हो सकती है।