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किशाऊ डैम पर 6 राज्यों की बैठक, लागत और पानी के बंटवारे पर बनी सहमति

दिल्ली में मंगलवार को किशाऊ मल्टीपर्पज डैम प्रोजेक्ट को लेकर छह राज्यों के मुख्यमंत्रियों की अहम बैठक हुई। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह की पहल पर गृह मंत्रालय में हुई इस बैठक में हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड, उत्तर प्रदेश, हरियाणा, राजस्थान और दिल्ली के मुख्यमंत्री शामिल हुए। कुछ मुख्यमंत्री बैठक में प्रत्यक्ष मौजूद रहे, जबकि कुछ ने ऑनलाइन हिस्सा लिया। बैठक का मुख्य फोकस लंबे समय से अटकी इस महत्वाकांक्षी परियोजना को आगे बढ़ाने और राज्यों के बीच लंबित मुद्दों को सुलझाने पर रहा।

किशाऊ परियोजना उत्तराखंड के देहरादून और हिमाचल प्रदेश के सिरमौर जिले की सीमा पर टोंस नदी पर प्रस्तावित है। टोंस, यमुना की प्रमुख सहायक नदी है। परियोजना के तहत करीब 236 मीटर ऊंचा कंक्रीट बांध बनाया जाना है। इससे 660 मेगावाट बिजली उत्पादन के साथ करीब 1,324 मिलियन क्यूबिक मीटर पानी संग्रहित किया जा सकेगा। इस पानी का इस्तेमाल छह राज्यों में पेयजल और सिंचाई के लिए किया जाएगा। परियोजना से करीब 97 हजार हेक्टेयर अतिरिक्त सिंचाई क्षमता विकसित होने की उम्मीद है।

परियोजना की अनुमानित लागत करीब 15 हजार करोड़ रुपये है। बैठक में जल संबंधी कार्यों की 90 फीसदी लागत केंद्र सरकार द्वारा उठाने और बाकी 10 फीसदी खर्च छह राज्यों द्वारा साझा करने पर सहमति बनी है। हालांकि, हिमाचल प्रदेश लंबे समय से परियोजना की लागत और अपने हिस्से को लेकर सवाल उठाता रहा है। राज्य का तर्क है कि जमीन और पानी देने के बावजूद उस पर बिजली उत्पादन का बड़ा आर्थिक बोझ नहीं डाला जाना चाहिए। इसके अलावा विस्थापन, पुनर्वास, पर्यावरणीय प्रभाव और डूब क्षेत्र को लेकर भी चिंताएं हैं। बैठक में हिमाचल के हिस्से का कुछ पानी दिल्ली और राजस्थान को देने पर भी सहमति बनी। इसके बदले दोनों राज्य बिजली उत्पादन से जुड़े हिमाचल के खर्च में योगदान करेंगे। अब परियोजना को केंद्रीय मंत्रिमंडल की मंजूरी के लिए रखा जा सकता है।