भारत के महत्वाकांक्षी मानव अंतरिक्ष मिशन गगनयान को एक और बड़ी सफलता मिली है। इसरो ने गगनयान कार्यक्रम के तहत दूसरा इंटीग्रेटेड एयर ड्रॉप टेस्ट (IADT-02) सफलतापूर्वक पूरा कर लिया है। यह परीक्षण आंध्र प्रदेश स्थित सतीश धवन अंतरिक्ष केंद्र में किया गया, जिसे मिशन की तैयारियों के लिए एक महत्वपूर्ण उपलब्धि माना जा रहा है। गगनयान मिशन का सबसे अहम पहलू अंतरिक्ष यात्रियों की सुरक्षित वापसी है। इसी प्रक्रिया को परखने के लिए IADT यानी इंटीग्रेटेड एयर ड्रॉप टेस्ट किया जाता है। इस परीक्षण में एक डमी क्रू मॉड्यूल को ऊंचाई से गिराकर उसके पैराशूट सिस्टम और रिकवरी मैकेनिज्म की जांच की जाती है, ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि अंतरिक्ष से लौटते समय क्रू मॉड्यूल सुरक्षित रूप से पृथ्वी पर उतर सके।
गगनयान कार्यक्रम के लिए सरकार ने लगभग 10,000 करोड़ रुपये का बजट आवंटित किया है। यह मिशन अब अपने अंतिम चरणों की ओर बढ़ रहा है और योजना के अनुसार पहली मानवयुक्त उड़ान 2027 की पहली तिमाही में हो सकती है। इससे पहले इसरो कई मानवरहित परीक्षण मिशन भी करेगा, ताकि हर प्रणाली की विश्वसनीयता सुनिश्चित की जा सके। गगनयान मिशन भारत का पहला मानव अंतरिक्ष उड़ान कार्यक्रम है, जिसका उद्देश्य भारतीय अंतरिक्ष यात्रियों को पृथ्वी की निचली कक्षा (लो अर्थ ऑर्बिट) में भेजना और उन्हें सुरक्षित वापस लाना है।
इस मिशन के तहत तीन अंतरिक्ष यात्री लगभग 400 किलोमीटर की ऊंचाई पर करीब तीन दिन तक अंतरिक्ष में रहेंगे।इस मिशन के सफल होने पर भारत उन चुनिंदा देशों की सूची में शामिल हो जाएगा, जिनके पास मानव अंतरिक्ष उड़ान की क्षमता है। अभी तक यह उपलब्धि केवल अमेरिका, रूस और चीन के पास ही है। इस मिशन के लिए चार भारतीय वायुसेना पायलटों—प्रशांत बालकृष्णन नायर, अजीत कृष्णन, अंगद प्रताप और शुभांशु शुक्ला—को अंतरिक्ष यात्री के रूप में चुना गया है। ये सभी विशेष प्रशिक्षण प्राप्त कर चुके हैं और भारत के पहले मानव अंतरिक्ष मिशन का हिस्सा बनने के लिए तैयार हैं।









