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कच्चे तेल की कीमतें रिकॉर्ड पर, भारत और वैश्विक बाजार में भू-राजनीतिक तनाव बढ़ा रहा दबाव

इंटरनेशनल मार्केट में कच्चे तेल की कीमतों ने नई ऊँचाई छू ली है। अमेरिका और भारत में तेल की कीमतें लगातार बढ़ रही हैं, जिससे ग्लोबल मार्केट में निवेशकों के बीच चिंता बढ़ गई है। भारत में मंगलवार को अप्रैल सप्लाई वाला कच्चा तेल 10,888 रुपये प्रति बैरल के रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गया, जबकि मई सप्लाई का वायदा 9,485 रुपये प्रति बैरल पर था। दिन के दौरान कीमतों में उतार-चढ़ाव भी देखा गया, जो आपूर्ति में संभावित रुकावट और पश्चिम एशिया में भू-राजनीतिक तनाव के कारण है।

अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अमेरिकी तेल (WTI) का वायदा 116 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंच गया, जबकि खाड़ी देशों का ब्रेंट तेल 111.4 डॉलर प्रति बैरल हुआ। विशेषज्ञों के अनुसार, ईरान और होर्मुज स्ट्रेट से जुड़े तनाव, संभावित हमलों और सैन्य गतिविधियों ने आपूर्ति पर दबाव डाला है। अमेरिकी राष्ट्रपति की ईरान को दी गई समयसीमा और इजराइल की हालिया कार्रवाई ने निवेशकों में अस्थिरता और चिंता बढ़ा दी है।

विशेषज्ञों का मानना है कि होर्मुज स्ट्रेट, जो ग्लोबल तेल फ्लो के लिए महत्वपूर्ण है, पर किसी भी अनिश्चितता का सीधा असर कीमतों पर पड़ता है। डॉलर के मुकाबले रुपया कमजोर होने और वैश्विक मांग की स्थिति ने भी भारत में तेल की कीमतों को बढ़ाने में भूमिका निभाई है। विश्लेषकों का कहना है कि जब तक क्षेत्रीय तनाव और आपूर्ति संबंधी अनिश्चितताएं बनी रहेंगी, कच्चे तेल की कीमतें ऊँचाई पर बनी रहेंगी और बाजार में उतार-चढ़ाव जारी रहेंगे।