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भारत में एयरपोर्ट सुरक्षा उपकरणों की जांच के लिए स्थापित होगें State-of-the-art टेस्टिंग सेंटर

भारत सरकार ने हवाईअड्डों की सुरक्षा को और मजबूत बनाने के लिए देश में ही एयरपोर्ट सुरक्षा उपकरणों की जांच और प्रमाणन के लिए स्टेट-ऑफ-द-आर्ट टेस्टिंग सेंटर स्थापित करने का निर्णय लिया है। इस पहल के तहत फुल बॉडी स्कैनर (FBS) और अन्य सुरक्षा उपकरणों का मूल्यांकन और प्रमाणन किया जाएगा। इस योजना के लिए नागरिक उड्डयन सुरक्षा ब्यूरो (BCAS) और राष्ट्रीय रक्षा विश्वविद्यालय (RRU) के बीच समझौता हुआ है। दोनों संस्थाएं मिलकर एक अत्याधुनिक जांच केंद्र तैयार करेंगी, जहां सुरक्षा उपकरणों की गहन जांच, सेफ्टी, प्रशिक्षण, स्टैंडर्ड डेवलपमेंट और इंटरऑपरेबिलिटी टेस्टिंग होगी। इस केंद्र में उपकरणों का स्वतंत्र मूल्यांकन किया जाएगा और रिपोर्ट तैयार की जाएगी।

इस समझौते से मूल उपकरण निर्माता (OEMs) को अपने उपकरणों की जांच और प्रमाणन के लिए भारत में ही सुविधा मिलेगी। इससे देश के सुरक्षा उपकरणों के मानक विकसित होंगे और विदेशों पर निर्भरता कम होगी। BCAS की नियामक शक्ति और RRU की तकनीकी विशेषज्ञता मिलकर अंतरराष्ट्रीय मानकों के बराबर इकोसिस्टम तैयार किया जाएगा। नए टेस्टिंग सेंटर में उपकरणों की जांच के साथ-साथ शोध, प्रशिक्षण, वर्कशॉप और स्किल डेवलपमेंट पर भी जोर दिया जाएगा। यह सुनिश्चित करेगा कि केवल मानकों पर खरे उतरने वाले उपकरण ही एयरपोर्ट पर तैनात किए जाएं।

देश में एयरपोर्ट्स की संख्या 2014 में 74 से बढ़कर अब 165 हो गई है। हर घंटे लगभग 250-300 फ्लाइट मूवमेंट और 40-45 हजार यात्री यात्रा कर रहे हैं। ऐसे में सुरक्षा में उच्च तकनीक और प्रोफेशनल दक्षता बेहद जरूरी हो गई है। सरकार का लक्ष्य है कि भारत एविएशन सुरक्षा उपकरणों के टेस्टिंग और प्रमाणन का ग्लोबल सेंटर बने। यह कदम पहले उठाए गए MRO (मेंटेनेंस, रिपेयरिंग और ओवरहॉलिंग) के फैसलों के बाद, देश को विमानन सुरक्षा और सेवा के क्षेत्र में वैश्विक मान्यता दिलाने में मदद करेगा। सरकार का कहना है कि नई योजना से उच्च शिक्षा में ड्रॉपआउट रेट कम होगा और छात्र भविष्य में रोजगार के अवसरों के लिए बेहतर तरीके से तैयार होंगे।