पिछले एक महीने से मध्य पूर्व में जारी संघर्ष ने होर्मुज जलडमरूमध्य और उसके आसपास फंसे करीब 3000 जहाजों को गंभीर संकट में डाल दिया है। इन जहाजों पर सवार लगभग 20,000 नाविक हर पल खतरे के साये में जी रहे हैं। कई जहाजों पर खाने-पीने का सामान खत्म हो चुका है या खत्म होने की कगार पर है, जिससे हालात और भी खराब हो गए हैं। नाविकों की सहायता करने वाली संस्थाओं के मुताबिक, फंसे हुए क्रू मेंबर्स लगातार मदद की गुहार लगा रहे हैं। वे अपने देशों में सुरक्षित वापसी, उचित मुआवजा और जरूरी आपूर्ति की मांग कर रहे हैं। इतनी बड़ी संख्या में संदेश आ रहे हैं कि हेल्पलाइन टीमें भी दबाव में हैं।
एक नाविक ने 24 मार्च को भेजे ईमेल में बताया कि जहाज पर राशन की भारी कमी है और एक क्रू सदस्य की तबीयत गंभीर है, इसलिए तुरंत सहायता की जरूरत है। फरवरी के अंत से अब तक हजारों संदेश प्राप्त हो चुके हैं, जिनमें कई नाविकों ने हमलों के वीडियो भी भेजे हैं और जहाज छोड़ने में मदद मांगी है। स्थिति इतनी भयावह है कि नाविक आधी रात को भी कॉल कर मदद मांग रहे हैं। वहीं, कम वेतन भी एक बड़ी समस्या है। कई नाविक बेहद जोखिम के बावजूद सिर्फ 16 डॉलर रोज़ की कमाई पर काम कर रहे हैं और मजबूरी में जहाज नहीं छोड़ पा रहे।









