दिल्ली पुलिस ने गाजीपुर इलाके से लश्कर-ए-तैबा के ऑपरेटिव शब्बीर अहमद लोन को गिरफ्तार किया, जिसके बाद हुई पूछताछ में पाकिस्तान की आईएसआई समर्थित आतंकी साजिश का खुलासा हुआ। जांच में सामने आया कि लोन और उसके सहयोगियों ने दिल्ली के व्यावसायिक और धार्मिक स्थलों की रेकी की, जिनमें कालकाजी मंदिर, लोटस टेंपल और छतरपुर मंदिर शामिल थे। रेकी के वीडियो पाकिस्तान भेजे गए और लोन की पहचान हुई। लोन ने पूछताछ में बताया कि आईएसआई टीआरएफ मॉडल पर भारत में एक नया आतंकी संगठन स्थापित करने की योजना बना रही थी। लोन नियमित रूप से पाकिस्तान में लश्कर-ए-तैबा के संचालक आसिफ डार और सुमामा बाबर से संपर्क में था। वह एन्क्रिप्टेड चैट के जरिए संपर्क बनाए रखता था और बाद में विशेष मोबाइल नंबर का उपयोग किया, जिससे जांचकर्ताओं को नेटवर्क का पता चला।
जांच में यह भी पता चला कि लोन को रसद और प्रशिक्षण के लिए लश्कर-ए-तैबा के सदस्य अबू हुज़ेफ़ा, अबू बकर और फ़ैसल ने सहायता दी। लोन ने बुनियादी हथियार प्रशिक्षण, उन्नत हथियार और आईईडी संचालन का प्रशिक्षण पूरा किया। इसके बाद आईएसआई ने उसे बांग्लादेश में ऑपरेशनल सेल बनाने के लिए भेजा, जहां उसने भारत के लिए हमलों की योजना बनाई और स्थानीय युवाओं को भर्ती किया। लोन का आतंकवादी इतिहास पुराना है; वह 2007 और 2015 में भी गिरफ्तार हो चुका था। वह जम्मू और कश्मीर के श्रीनगर का निवासी है और कथित तौर पर दिल्ली और कोलकाता में राष्ट्र-विरोधी पोस्टर लगाने वाले मॉड्यूल का हैंडलर था।









