मिडिल-ईस्ट में जारी संघर्ष का असर अब भारत के कई राज्यों में साफ दिख रहा है, और एलपीजी संकट ने उद्योग और आम जीवन दोनों को प्रभावित किया है। राजस्थान में कमर्शियल एलपीजी की कमी के कारण कपड़ा, मार्बल और केमिकल फैक्ट्रियां बंद हो रही हैं, जिससे हजारों मजदूरों को बेरोजगारी का सामना करना पड़ रहा है। जयपुर के प्लेटफार्मों पर मजदूर अपने सामान के साथ घर लौटने के लिए ट्रेन में चढ़ने के लिए भिड़ रहे हैं।
मुंबई में लोग एक सिलेंडर के लिए लंबी कतारों में खड़े हैं और कालाबाजारी के चलते कीमतें 2,500-3,000 रुपये तक पहुंच गई हैं। सामान्य सिलेंडर पहले 900-1,000 रुपये में मिलता था। इसी तरह, सूरत में भी गैस की कमी ने प्रवासी मजदूरों को बड़े पैमाने पर गांव लौटने पर मजबूर कर दिया है।
सरकारी हेल्पलाइन पर इंडस्ट्री मालिकों को कोई ठोस मदद नहीं मिल रही है, जिससे आपूर्ति और भी प्रभावित हो रही है। मजदूरों का कहना है कि गांव में कम से कम जलावन और खेती के साधन मौजूद हैं, इसलिए वे खाना बनाने और रोज़मर्रा की जरूरतों के लिए घर लौट रहे हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि अगर अंतरराष्ट्रीय तनाव कम नहीं हुआ, तो एलपीजी की किल्लत और बढ़ सकती है। आम जनता का बस एक ही आग्रह है कि “युद्ध कहीं भी हो, हमारे घर का चूल्हा नहीं बुझना चाहिए।”









