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टीवी रेटिंग सिस्टम में बड़ा बदलाव: सरकार ने जारी की नई पॉलिसी 2026

सरकार ने टीवी रेटिंग को पारदर्शी और भरोसेमंद बनाने के लिए ‘टीवी रेटिंग पॉलिसी 2026’ लागू कर दी है। नई पॉलिसी का मुख्य उद्देश्य दर्शकों की संख्या मापने की प्रक्रिया में कमियों को दूर करना और विज्ञापनों में होने वाले फर्जीवाड़े पर रोक लगाना है। नई पॉलिसी में स्पष्ट किया गया है कि केबल या डीटीएच प्लेटफॉर्म के शुरुआती पेज (लैंडिंग पेज) पर चैनल लगवाने से मिलने वाली व्यूअरशिप को रेटिंग में नहीं गिना जाएगा। इसे केवल मार्केटिंग टूल के तौर पर इस्तेमाल किया जा सकेगा, लेकिन इसकी जानकारी रेटिंग एजेंसी को देना अनिवार्य होगी।

सरकार ने रेटिंग एजेंसियों के रजिस्ट्रेशन नियमों में ढील दी है। अब किसी भी कंपनी के लिए नेटवर्थ की सीमा ₹20 करोड़ से घटाकर ₹5 करोड़ कर दी गई है। इसके अलावा, एजेंसी के बोर्ड में कम से कम 50% स्वतंत्र डायरेक्टर होना अनिवार्य है, ताकि निष्पक्षता बनी रहे। रेटिंग की सटीकता बढ़ाने के लिए मीटर वाले घरों की संख्या बढ़ाकर 80,000 करने का निर्देश दिया गया है, भविष्य में इसे 1,20,000 तक ले जाने का लक्ष्य है। डेटा के संग्रह में डिजिटल पर्सनल डेटा प्रोटेक्शन (DPDP) एक्ट 2023 का पालन अनिवार्य होगा। ओटीटी और कनेक्टेड टीवी से भी डेटा लिया जाएगा।

नई पॉलिसी के तहत ‘डुअल-ऑडिट’ सिस्टम लागू किया गया है। इसमें हर तीन महीने में इंटरनल ऑडिट और साल में एक बार स्वतंत्र बाहरी ऑडिट कराना होगा। नियमों का उल्लंघन करने वाली एजेंसी पर रेटिंग सस्पेंशन या रजिस्ट्रेशन रद्द करने जैसे कड़े जुर्माने लगाए जा सकते हैं। दर्शकों और ब्रॉडकास्टर्स की शिकायतों के लिए नोडल अधिकारी 10 दिनों के भीतर समाधान करेंगे। इस नई पॉलिसी से भारत का ब्रॉडकास्टिंग एनवायरनमेंट और अधिक पारदर्शी, जवाबदेह और भरोसेमंद बनने की उम्मीद है।