वैश्विक तेल बाजार में लगातार उतार-चढ़ाव के बीच भारत सरकार ने ईंधन से जुड़ी अपनी कर नीति में बड़ा बदलाव किया है। सरकार ने डीजल और विमानन टरबाइन ईंधन (ATF) के निर्यात पर फिर से विंडफॉल टैक्स लागू कर दिया है। नए आदेश के अनुसार, डीजल के निर्यात पर 21.5 रुपये प्रति लीटर और ATF पर 29.5 रुपये प्रति लीटर का कर लगेगा। यह फैसला ऐसे समय में आया है जब अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतें अस्थिर बनी हुई हैं।
दिलचस्प बात यह है कि जहां निर्यात पर टैक्स बढ़ाया गया है, वहीं घरेलू उपभोक्ताओं को राहत देने के लिए पेट्रोल और डीजल पर उत्पाद शुल्क में बड़ी कटौती की गई है। पेट्रोल पर टैक्स घटाकर 3 रुपये प्रति लीटर कर दिया गया है, जबकि डीजल पर इसे पूरी तरह समाप्त कर दिया गया है। इससे आम जनता को सीधे तौर पर ईंधन की कीमतों में राहत मिलने की उम्मीद है।
सरकार का यह कदम ऊर्जा कंपनियों के मुनाफे और घाटे के बीच संतुलन बनाने की कोशिश के तौर पर देखा जा रहा है। पिछले साल विंडफॉल टैक्स हटाए जाने के बाद अब इसे फिर लागू करना इस बात का संकेत है कि सरकार बदलते वैश्विक हालात के अनुसार अपनी रणनीति में लचीलापन बनाए रखना चाहती है।
हाल ही में निजी कंपनियों द्वारा ईंधन कीमतों में बढ़ोतरी के बाद भी यह निर्णय अहम माना जा रहा है। सरकार का मानना है कि टैक्स में यह पुनर्संतुलन तेल कंपनियों पर बढ़ते दबाव को कम करने के साथ-साथ उपभोक्ताओं को राहत देने में मदद करेगा।









