कांग्रेस के वरिष्ठ नेता Shashi Tharoor ने पश्चिम एशिया में जारी तनाव को लेकर भारत की भूमिका पर निराशा जताई है। उन्होंने कहा कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मजबूत छवि और सभी पक्षों से संतुलित संबंध होने के बावजूद भारत इस संकट में नेतृत्वकारी भूमिका निभाने से पीछे रह गया।
अमेरिका और ईरान के बीच चल रही परोक्ष कूटनीतिक कोशिशों में पाकिस्तान, तुर्की और मिस्र की भागीदारी की खबरों पर प्रतिक्रिया देते हुए थरूर ने कहा कि उन्होंने पहले भारत सरकार के सतर्क और शांत रुख का समर्थन किया था। उनका मानना था कि भारत इस स्थिति का उपयोग शांति स्थापना की दिशा में पहल करने के लिए करेगा।
थरूर ने अफसोस जताते हुए कहा कि मौजूदा हालात उम्मीदों के अनुरूप नहीं हैं। उन्होंने इसे दुर्भाग्यपूर्ण बताते हुए कहा कि पाकिस्तान जैसे देश अब मध्यस्थता की कोशिशों में आगे नजर आ रहे हैं, जो भारत के लिए एक तरह से निराशाजनक स्थिति है। हालांकि उन्होंने यह भी कहा कि अगर कोई भी देश शांति स्थापित करने की कोशिश करता है तो उसका स्वागत होना चाहिए।
उन्होंने बार-बार इस बात पर जोर दिया कि भारत के पास दोनों पक्षों के साथ अच्छे संबंध होने के कारण शांति वार्ता शुरू करने का एक विशेष अवसर था। लेकिन अब जब अन्य देश इस भूमिका में सामने आ चुके हैं, तो भारत को इसका कोई श्रेय नहीं मिल रहा।
यह बयान उस सर्वदलीय बैठक के संदर्भ में आया, जिसकी अध्यक्षता रक्षा मंत्री Rajnath Singh ने की। बैठक में विदेश मंत्री Subrahmanyam Jaishankar सहित कई वरिष्ठ अधिकारियों ने क्षेत्रीय स्थिति, ऊर्जा सुरक्षा और विदेशों में भारतीयों की सुरक्षा पर जानकारी दी।









