जनवरी 2025 में पोरबंदर में हुए एएलएच ध्रुव हेलिकॉप्टर हादसे के बाद ग्राउंड किए गए पूरे फ्लीट की अब धीरे-धीरे वापसी शुरू हो गई है। करीब 15 महीने बाद भारतीय तटरक्षक बल (ICG) ने ध्रुव हेलिकॉप्टरों को सीमित ऑपरेशन के तहत फिर से उड़ाना शुरू कर दिया है, जिससे समुद्री सुरक्षा को मजबूती मिलने की उम्मीद है। रक्षा अधिकारियों के अनुसार, पिछले दो हफ्तों से ध्रुव हेलिकॉप्टर चरणबद्ध तरीके से उड़ान भर रहे हैं। इसकी शुरुआत कोच्चि से की गई, जिसके बाद भुवनेश्वर और चेन्नई बेस से भी ऑपरेशन शुरू हो चुके हैं। अगले चरण में पोरबंदर में भी इन्हें तैनात किया जाएगा।
सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए हेलिकॉप्टरों को फिलहाल सीमित घंटों के लिए उड़ाया जा रहा है। लगभग 100 घंटे की उड़ान पूरी होने के बाद इनकी विस्तृत तकनीकी जांच की जाएगी। इस बार सामान्य प्रक्रिया से पहले ही निरीक्षण किया जा रहा है ताकि किसी भी संभावित खामी को समय रहते दूर किया जा सके।गौरतलब है कि हादसे के बाद थलसेना, वायुसेना, नौसेना और कोस्ट गार्ड के 300 से अधिक ध्रुव हेलिकॉप्टरों को एहतियातन ग्राउंड कर दिया गया था। जांच के बाद थलसेना और वायुसेना के हेलिकॉप्टरों को मई में ही उड़ान की अनुमति मिल गई थी, जबकि नौसेना और कोस्ट गार्ड के हेलिकॉप्टरों की वापसी में अतिरिक्त सावधानी बरती गई।
दरअसल, नौसेना और कोस्ट गार्ड के ध्रुव हेलिकॉप्टर विशेष रूप से समुद्री अभियानों के लिए तैयार किए जाते हैं। इनमें एडवांस सेंसर, मजबूत अंडरकैरेज, युद्धपोतों पर लैंडिंग की क्षमता और आपात स्थिति में पानी पर उतरने के लिए फ्लोटेशन डिवाइस जैसी सुविधाएं होती हैं। फिलहाल कोस्ट गार्ड के पास 18 ध्रुव हेलिकॉप्टर हैं, जबकि 6 और हेलिकॉप्टरों की खरीद प्रक्रिया जारी है। वहीं, नौसेना के पास भी 18 एएलएच मौजूद हैं। थलसेना इस फ्लीट की सबसे बड़ी ऑपरेटर है, जिसके पास करीब 145 ध्रुव हेलिकॉप्टर हैं। फिलहाल इनकी पूरी तरह वापसी से पहले कड़ी निगरानी और परीक्षण जारी रहेगा।









