सुप्रीम कोर्ट ने भारतीय सशस्त्र बलों में लैंगिक समानता को मजबूत करते हुए एक महत्वपूर्ण फैसला सुनाया है। अदालत ने स्पष्ट किया कि महिला शॉर्ट सर्विस कमीशन (SSC) अधिकारियों को परमानेंट कमीशन (PC) पाने का पूरा अधिकार है। कोर्ट ने सेना की मूल्यांकन प्रणाली को “दोषपूर्ण और भेदभावपूर्ण” बताते हुए इसमें व्यापक सुधार के निर्देश दिए।
अदालत ने कहा कि परमानेंट कमीशन के लिए हर साल 250 महिला अधिकारियों की सीमा मनमानी है और इसे स्थायी मानदंड नहीं माना जा सकता। कोर्ट ने पाया कि महिला अधिकारियों के साथ लंबे समय से पक्षपातपूर्ण व्यवहार हुआ, जिसमें उनकी वार्षिक गोपनीय रिपोर्ट (ACRs) का निष्पक्ष मूल्यांकन नहीं किया गया। यह भी सामने आया कि उन्हें करियर बढ़ाने वाले कोर्स और महत्वपूर्ण नियुक्तियों से वंचित रखा गया।
कोर्ट ने अपने विशेष अधिकारों का उपयोग करते हुए निर्देश दिया कि जिन महिला अधिकारियों को परमानेंट कमीशन मिलना चाहिए था, उन्हें 20 साल की सेवा पूरी मानते हुए पेंशन और अन्य सभी लाभ दिए जाएं। यह राहत उन अधिकारियों को भी मिलेगी जिन्हें पहले अयोग्य घोषित कर दिया गया था। नेवी और एयर फोर्स के मामलों में भी अदालत ने पारदर्शिता और निष्पक्षता सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। साथ ही तीनों सेनाओं में मूल्यांकन प्रणाली की समीक्षा करने को कहा, ताकि भविष्य में किसी भी तरह का संरचनात्मक भेदभाव समाप्त किया जा सके।









