केंद्र सरकार महिलाओं के लिए संसद और राज्य विधानसभाओं में 33% आरक्षण लागू करने की दिशा में तेजी दिखा रही है। महिला रिजर्वेशन एक्ट 2023 पारित हो चुका है, लेकिन डिलिमिटेशन प्रक्रिया लंबित होने के कारण यह अब तक लागू नहीं हो सका है। सूत्रों के अनुसार, सरकार अब इसे 2011 की जनगणना के आधार पर लागू करने पर विचार कर रही है।
इस योजना के तहत लोकसभा की कुल सीटों की संख्या मौजूदा 543 से बढ़कर 816 होने की संभावना है, जिसमें से 273 सीटें महिलाओं के लिए आरक्षित होंगी। राज्य विधानसभाओं में भी इसी अनुपात में आरक्षण लागू किया जाएगा। मूल कानून के मुताबिक, आरक्षण तभी प्रभावी होगा जब नई जनगणना और परिसीमन पूरी हो जाए। हालांकि, सरकार इस प्रक्रिया में तेजी लाकर इसे जल्दी लागू करना चाहती है। यदि यह कानून परिसीमन से पहले लागू किया जाता है, तो इसके लिए एक और संवैधानिक संशोधन की आवश्यकता होगी।
सूत्रों का कहना है कि कैबिनेट की मंजूरी मिलने के बाद यह बिल अगले हफ्ते राज्यसभा में पेश किया जा सकता है। सरकार का लक्ष्य है कि इस ऐतिहासिक कदम पर सभी प्रमुख राजनीतिक दलों की सहमति बनाई जाए, ताकि संसद और विधानसभाओं में महिलाओं की 33% भागीदारी का सपना साकार हो सके।
वर्तमान में, भाजपा के पास लोकसभा में 240 और राज्यसभा में 103 सदस्य हैं। विपक्षी दलों के समर्थन के बिना यह संशोधन पारित करना चुनौतीपूर्ण होगा। हाल ही में कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने संसद में महिला आरक्षण एक्ट लागू करने के रोडमैप पर चर्चा के लिए पार्लियामेंट्री अफेयर्स मंत्री किरेन रिजिजू से ऑल-पार्टी मीटिंग बुलाने का अनुरोध किया था। यह कदम न केवल महिलाओं की राजनीतिक भागीदारी को मजबूत करेगा, बल्कि लोकतंत्र में उनकी आवाज़ को भी सशक्त बनाएगा।









