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2030 से IAF को मिलेंगे 18 नए राफेल, F5 वर्जन से बढ़ेगी ‘ड्रोन कमांड’ क्षमता

भारतीय वायुसेना को मार्च 2030 से 18 नए राफेल लड़ाकू विमान मिलने शुरू हो सकते हैं। रक्षा सूत्रों के अनुसार ये सभी विमान फ्रांस में निर्मित होंगे और अत्याधुनिक F4 स्टैंडर्ड में होंगे। भारत में बनने वाले राफेल विमानों की डिलीवरी 2031 के अंत या 2032 की शुरुआत से शुरू होने की संभावना है। यह कदम वायुसेना की मारक क्षमता और तकनीकी बढ़त को मजबूत करने की दिशा में अहम माना जा रहा है।

सूत्रों के मुताबिक शुरुआत में मिलने वाले करीब 90 विमान F4 स्टैंडर्ड में हो सकते हैं, जबकि अंतिम 24 विमानों को और अधिक उन्नत F5 वर्जन में देने की योजना है। राफेल का F5 वर्जन 2030 से 2032 के बीच पूरी तरह ऑपरेशनल हो सकता है। फ्रांस भी इसी अवधि से अपने बेड़े में F5 विमानों को शामिल करना शुरू करेगा। डील में यह प्रावधान भी संभव है कि भारतीय वायुसेना अपने मौजूदा 36 राफेल (जो वर्तमान में F3R वर्जन में हैं) और आने वाले F4 विमानों को भविष्य में F5 स्टैंडर्ड में अपग्रेड कर सके।

F5 वर्जन की सबसे बड़ी खासियत इसकी एडवांस ड्रोन कंट्रोल क्षमता होगी। यह विमान एक तरह से ‘मदर एयरक्राफ्ट’ की तरह काम करेगा और अपने साथ उड़ने वाले ड्रोन समूह को निर्देश दे सकेगा। इसके अलावा इसमें अधिक शक्तिशाली इंजन लगाए जाने की योजना है, जिससे लगभग 20 प्रतिशत अतिरिक्त ताकत मिल सकती है। विशेषज्ञों के अनुसार यह क्षमता भविष्य की नेटवर्क-सेंट्रिक और मल्टी-डोमेन वॉरफेयर में निर्णायक भूमिका निभा सकती है।

रक्षा सूत्रों का कहना है कि यदि परिस्थितियां अनुकूल रहीं तो भारत F4 विमानों की संख्या घटाकर अधिक F5 विमान लेने पर भी विचार कर सकता है। हालांकि इस पर अभी अंतिम फैसला नहीं हुआ है। 12 फरवरी 2026 को रक्षा मंत्री Rajnath Singh की अध्यक्षता में हुई बैठक में Defence Acquisition Council (DAC) ने कुल 3.60 लाख करोड़ रुपये के हथियार खरीद प्रस्तावों को मंजूरी दी थी। इनमें 3.25 लाख करोड़ रुपये की 114 राफेल लड़ाकू विमानों की मेगा डील भी शामिल है, जिसे भारतीय वायु शक्ति को नई ऊंचाई देने वाला कदम माना जा रहा है।