भारतीय रेलवे ने ऑनलाइन टिकट बुकिंग व्यवस्था को और सुरक्षित बनाने के लिए नई तकनीक लागू की है। रेलवे द्वारा Indian Railway Catering and Tourism Corporation (IRCTC) की टिकट बुकिंग प्रणाली में एआई आधारित प्रेडिक्टिव सिस्टम लागू किया गया है, जिसका उद्देश्य अवैध सॉफ्टवेयर और दलालों पर लगाम लगाना है। इस नई तकनीक के जरिए सिस्टम यह पहचान करेगा कि टिकट बुकिंग कोई वास्तविक व्यक्ति कर रहा है या किसी ऑटोमेटेड सॉफ्टवेयर का उपयोग किया जा रहा है। अगर कोई यूजर तेज गति से फॉर्म भरता है, बार-बार लॉगिन-लॉगआउट करता है या संदिग्ध गतिविधि करता है, तो उसकी आईडी अस्थायी रूप से ब्लॉक की जा सकती है।
रेलवे अधिकारियों के अनुसार, यदि कोई यात्री 4.2 सेकंड से कम समय में कई यात्रियों की जानकारी भरता है, तो उसे सिस्टम संदिग्ध मान सकता है। इसके अलावा यदि कोई यूजर आधे घंटे में पांच बार से ज्यादा लॉगिन या लॉगआउट करता है, तो उसका अकाउंट 24 घंटे के लिए ब्लॉक किया जा सकता है। रेलवे ने यह भी स्पष्ट किया है कि एक ही महीने में लाखों संदिग्ध खातों को पहले ही ब्लॉक किया जा चुका है ताकि कन्फर्म टिकट की उपलब्धता आम यात्रियों तक बढ़ाई जा सके।
दूसरी ओर, रेलवे डिजिटल पेमेंट और कैशलेस ट्रांजैक्शन को बढ़ावा देने के लिए भी नई पहल कर रहा है। रेलवे द्वारा संचालित Railway Van (Railwayvan) App (रेलवन ऐप) के माध्यम से अनारक्षित टिकट बुकिंग पर अब सभी मान्यता प्राप्त डिजिटल पेमेंट माध्यमों से भुगतान करने पर 3 प्रतिशत बोनस छूट दी जाएगी। यह सुविधा 14 जनवरी 2026 से शुरु हुई और 14 जुलाई 2026 तक ट्रायल आधार पर लागू रहेगी। इससे पहले यह लाभ केवल आर-वॉलेट भुगतान पर ही मिलता था, लेकिन अब यूपीआई, डेबिट कार्ड, क्रेडिट कार्ड और नेट बैंकिंग जैसे सभी डिजिटल माध्यमों को इसमें शामिल किया गया है।
रेलवे की इस पहल से डिजिटल इंडिया अभियान को बढ़ावा मिलने के साथ-साथ रोजाना यात्रा करने वाले यात्रियों को भी सीधा आर्थिक लाभ मिलेगा। रेलवे अधिकारियों का कहना है कि इस व्यवस्था से टिकट बुकिंग प्रक्रिया अधिक पारदर्शी और सुरक्षित बनेगी तथा आम यात्रियों को कन्फर्म टिकट मिलने की संभावना भी बढ़ेगी।









