अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने वॉशिंगटन में ‘बोर्ड ऑफ पीस’ बैठक के दौरान भारत-पाकिस्तान के बीच संघर्षविराम का श्रेय खुद को दिया। उन्होंने कहा कि उनकी मध्यस्थता और टैरिफ की चेतावनी के कारण दोनों देशों के बीच तनाव कम हुआ। वहीं, भारत ने पहले की तरह इस दावे को खारिज किया और कहा कि संघर्षविराम सीधे द्विपक्षीय सैन्य वार्ता के जरिए तय हुआ था।
बैठक के दौरान पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ भी मौजूद थे। ट्रंप ने शरीफ को सार्वजनिक रूप से खड़े होने के लिए कहा और मंच से कहा, “भारत और पाकिस्तान, आप दोनों का धन्यवाद। मोदी एक महान व्यक्ति हैं और मेरे अच्छे दोस्त हैं।” इस दौरान उन्होंने पीएम मोदी की तारीफ करते हुए शरीफ को शर्मिंदा कर दिया।
शहबाज शरीफ ने इस अवसर पर अमेरिकी पहल की सराहना की और कहा कि सैन्य तनाव ‘ऑपरेशन सिंदूर’ के समय गंभीर था और तत्काल हस्तक्षेप से स्थिति बिगड़ने से बची। भारत ने स्पष्ट किया कि मई में हुए सैन्य टकराव के बाद संघर्षविराम दोनों देशों के डायरेक्टर जनरल ऑफ मिलिट्री ऑपरेशंस (DGMO) के बीच द्विपक्षीय बातचीत के माध्यम से हुआ। दिल्ली का रुख रहा है कि पाकिस्तान से जुड़े सभी मुद्दे केवल द्विपक्षीय ढांचे में ही हल किए जाएंगे।
विश्लेषक मानते हैं कि ट्रंप का बयान उसके अंतरराष्ट्रीय नेतृत्व को उजागर करने और अमेरिका-पाक रणनीतिक संबंधों को रेखांकित करने की कोशिश भी हो सकता है। इस घटना ने तीन अलग-अलग राजनीतिक संदेश प्रस्तुत किए हैं: ट्रंप की कूटनीतिक सफलता, भारत का द्विपक्षीय रुख और पाकिस्तान का अमेरिकी समर्थन स्वीकार करना।









