जीएसटी दरों में पिछले साल सितंबर में की गई कटौती से आम उपभोक्ताओं को बड़ी राहत मिली थी। साबुन, शैंपू, टूथपेस्ट और तेल जैसे दैनिक उपयोग के उत्पादों की कीमतें घटी थीं या स्थिर रखी गई थीं। लेकिन अब यह राहत धीरे-धीरे खत्म होती दिख रही है। बढ़ती इनपुट लागत और रुपये में गिरावट के कारण एफएमसीजी कंपनियां उत्पादों के दाम 2 से 5 प्रतिशत तक बढ़ा रही हैं।
कंपनियों का कहना है कि डॉलर के मुकाबले रुपये में लगातार गिरावट और वैश्विक बाजार में कच्चे माल की बढ़ती कीमतों से लागत पर दबाव बढ़ा है। 30 जनवरी को रुपया डॉलर के मुकाबले 92.02 के स्तर तक पहुंच गया था, जो अब तक का निचला स्तर माना जा रहा है।
कच्चे तेल से जुड़े उत्पादों जैसे लिक्विड पैराफिन, सर्फेक्टेंट, सल्फर और एन-पैराफिन की कीमतों में वृद्धि हुई है। वहीं नारियल तेल की कीमतें पिछले एक साल में दोगुनी हो चुकी हैं। आयातित वस्तुओं जैसे ओट्स और बादाम की लागत भी रुपये की कमजोरी के कारण बढ़ी है।
कंपनियों ने बढ़ाए दाम
- डाबर इंडिया ने चालू वित्त वर्ष की चौथी तिमाही में करीब 2% कीमतें बढ़ाने का फैसला किया है।
- टाटा कंज्यूमर प्रोडक्ट्स ने चाय की कीमतों में मामूली बढ़ोतरी की है और अधिकांश लागत बढ़ोतरी ग्राहकों पर डाली है।
- हिंदुस्तान यूनिलीवर ने संकेत दिया है कि साबुन, शैंपू, डिटर्जेंट और होम केयर उत्पादों की कीमतें बढ़ाई जा रही हैं। कंपनी अपने प्रमुख ब्रांड्स— Surf Excel, Rin, Vim और Domex— की कीमतों में वृद्धि कर रही है।
वितरकों के अनुसार डिटर्जेंट, हेयर ऑयल, बिस्कुट, नूडल्स, स्नैक्स और अनाज के कुछ पैकेट बढ़ी हुई कीमतों के साथ बाजार में पहुंचने लगे हैं। हालांकि जीएसटी कटौती के बाद बिक्री में औसतन 6% सालाना वृद्धि दर्ज की गई थी, लेकिन अब कीमतों में बढ़ोतरी से मांग पर असर पड़ सकता है। विश्लेषकों का मानना है कि यदि रुपये में गिरावट और कच्चे माल की महंगाई जारी रहती है, तो आने वाले महीनों में और उत्पाद महंगे हो सकते हैं। फिलहाल कंपनियां चरणबद्ध तरीके से कीमतें बढ़ा रही हैं, ताकि उपभोक्ताओं पर अचानक ज्यादा बोझ न पड़े।









