चिकित्सा क्षेत्र में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस की भूमिका लगातार मजबूत हो रही है। इसी कड़ी में दिल्ली एम्स के डॉक्टरों ने कर्नाटक में विकसित ‘श्वासा’ नामक एआई आधारित मोबाइल ऐप का अध्ययन किया है। यह ऐप स्मार्टफोन के जरिए मरीज की खांसी रिकॉर्ड कर उसकी ध्वनि का विश्लेषण करता है और फेफड़ों व श्वसन तंत्र से जुड़ी संभावित बीमारियों का संकेत देता है। विशेषज्ञों के अनुसार, यह तकनीक क्रॉनिक ऑब्स्ट्रक्टिव पल्मोनरी डिजीज (सीओपीडी) जैसी गंभीर बीमारियों की पहचान में भी सहायक हो सकती है।
एम्स के सेंटर फॉर कम्युनिटी मेडिसिन के एडिशनल प्रोफेसर डॉ. हर्षल रमेश साल्वे ने बताया कि उत्तर भारत में इस ऐप पर यह पहला अध्ययन था। शोध के दौरान 460 लोगों की खांसी के नमूनों का विश्लेषण किया गया, जिनके परिणाम काफी हद तक सटीक पाए गए। यह ऐप रिकॉर्ड की गई आवाज में सूक्ष्म पैटर्न पहचानकर पांच मिनट से कम समय में हेल्थ स्कोर प्रदान करता है।
डॉ. साल्वे के अनुसार, फेफड़ों की जांच के लिए आमतौर पर महंगे स्पाइरोमीटर और प्रशिक्षित विशेषज्ञों की आवश्यकता होती है, जो ग्रामीण या छोटे केंद्रों पर उपलब्ध नहीं होते। ऐसे में यह एआई प्लेटफॉर्म प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों और ‘आयुष्मान आरोग्य मंदिर’ जैसे संस्थानों में उपयोगी साबित हो सकता है। इससे बीमारियों की शुरुआती अवस्था में पहचान संभव होगी और समय पर उपचार मिल सकेगा।









