हाल ही में हुई रिसर्च में खुलासा हुआ है कि Gen-Z पीढ़ी के युवाओं में अपने माता-पिता की तुलना में शारीरिक और मानसिक ऊर्जा काफी कम है। अध्ययन के अनुसार, लगभग 73% युवा महसूस करते हैं कि उनका शरीर हमेशा थका हुआ रहता है और रोजमर्रा के काम करना भी मुश्किल हो जाता है। थकान, लो-एनर्जी और मानसिक दबाव इस पीढ़ी के लिए अब व्यक्तिगत समस्या नहीं, बल्कि एक बड़ा संकट बन गए हैं।
रिसर्च बताती है कि इसका मुख्य कारण खराब नींद, फाइनेंशियल स्ट्रेस, डिजिटल उपकरणों का अधिक उपयोग और बढ़ती महंगाई है। देर रात तक मोबाइल और लैपटॉप का इस्तेमाल नींद की गुणवत्ता को प्रभावित कर रहा है, वहीं करियर और भविष्य की चिंता मानसिक थकान बढ़ा रही है। करीब 69% युवा मानते हैं कि उनकी शारीरिक क्षमता माता-पिता से कम है, और इसका असर रोजमर्रा की जिंदगी, एक्सरसाइज, खाना बनाना, रिश्तों और यौन संबंध जैसी गतिविधियों पर भी पड़ रहा है।
विशेषज्ञों का कहना है कि यदि समय रहते इस समस्या पर ध्यान नहीं दिया गया तो Gen-Z में यह ‘एनर्जी क्राइसिस’ आगे चलकर बर्नआउट और गंभीर स्वास्थ्य समस्याओं का रूप ले सकती है। इसे रोकने के लिए बेहतर नींद, संतुलित आहार, नियमित व्यायाम और डिजिटल डिटॉक्स की सलाह दी जा रही है।









