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नए लेबर कानूनों के खिलाफ बैंक कर्मियों की 12 फरवरी को देशव्यापी हड़ताल

देशभर के बैंक कर्मचारी 12 फरवरी, 2026 को नए श्रम कानूनों के खिलाफ राष्ट्रव्यापी हड़ताल पर उतरेंगे। ऑल इंडिया बैंक एम्प्लॉइज़ एसोसिएशन (AIBEA), ऑल इंडिया बैंक ऑफिसर्स एसोसिएशन (AIBOA) और बैंक एम्प्लॉइज़ फेडरेशन ऑफ इंडिया (BEFI) सहित प्रमुख बैंक यूनियनों ने अपने सदस्यों और इकाइयों से इस हड़ताल में शामिल होने का आह्वान किया है। यह हड़ताल 10 केंद्रीय ट्रेड यूनियनों (CTU) के समर्थन में आयोजित की जा रही है।

हड़ताल का मुख्य कारण सरकार द्वारा नवंबर, 2025 में अधिसूचित चार नए श्रम कोड्स हैं। बैंक यूनियनों का कहना है कि ये कानून श्रमिकों के हितों के खिलाफ हैं और ट्रेड यूनियनों के पंजीकरण पर कठोर शर्तें लगाते हैं। इसके अलावा, 300 से कम कर्मचारियों वाले प्रतिष्ठानों के मालिकों को बिना अधिकारियों की अनुमति किसी भी कर्मचारी को बर्खास्त करने का अधिकार देने का प्रावधान कर्मचारियों की सुरक्षा को कमजोर करता है।

बैंक कर्मचारी 5-दिन के कार्य सप्ताह की भी मांग कर रहे हैं। यूनियनों का कहना है कि प्रमुख वित्तीय संस्थानों जैसे भारतीय रिज़र्व बैंक, LIC, शेयर बाजार और मल्टी-कमोडिटी एक्सचेंज में पांच-दिन का कार्य सप्ताह है, लेकिन बैंक कर्मचारियों को छह दिन काम करना पड़ता है। वे चाहते हैं कि बैंकिंग क्षेत्र में भी पांच-दिन का सप्ताह लागू हो। इसके अलावा, यूनियनों ने निश्चित अवधि के रोजगार को लेकर भी चिंता व्यक्त की है। उनका कहना है कि सरकार युवा बेरोजगारी को देखते हुए स्थायी रोजगार के बजाय सीमित अवधि वाले रोजगार की योजना पेश कर रही है, जो युवाओं के भविष्य के लिए जोखिम पैदा कर रही है।

AIBOA के महासचिव एस. नागराजन ने कहा कि 12 फरवरी को बैंक अधिकारी और कर्मचारी क्लैरिकल काम न करने और हड़ताल में सक्रिय रूप से भाग लेने के लिए तैयार रहें। बैंक कर्मचारी इस हड़ताल को श्रमिक अधिकारों की सुरक्षा और कार्य-संतुलन सुनिश्चित करने के लिए ‘आर-पार की लड़ाई’ के रूप में देख रहे हैं।