भारतीय रेलवे ने सेवानिवृत्त कर्मचारियों को दिए जाने वाले गोल्ड प्लेटेड सिल्वर मेडल की करीब दो दशक पुरानी परंपरा को तत्काल प्रभाव से बंद कर दिया है। हाल ही में सामने आए नकली मेडल मामले के बाद रेलवे बोर्ड ने यह अहम फैसला लिया है। रेलवे बोर्ड की प्रधान कार्यकारी निदेशक रेनू शर्मा ने बुधवार, 28 जनवरी 2026 को इस संबंध में आधिकारिक आदेश जारी किया। आदेश में स्पष्ट किया गया है कि अब रिटायर होने वाले अधिकारियों और कर्मचारियों को विदाई उपहार के रूप में सोने की परत चढ़ा चांदी का मेडल नहीं दिया जाएगा।
रेलवे ने मार्च 2006 से अपने कर्मचारियों को सेवा सम्मान के तौर पर लगभग 20 ग्राम वजनी गोल्ड प्लेटेड सिल्वर मेडल देना शुरू किया था। पिछले करीब 20 वर्षों में हजारों कर्मचारियों को यह सिक्का विदाई प्रतीक के रूप में दिया गया, जिसे रेलवे में सम्मान और समर्पण का प्रतीक माना जाता था। लेकिन भोपाल मंडल से जुड़े एक मामले ने इस परंपरा पर बड़ा सवाल खड़ा कर दिया। जांच में सामने आया कि कई मेडल कथित तौर पर चांदी के होने के बावजूद असल में बेहद घटिया गुणवत्ता के थे। रिपोर्ट के मुताबिक, उनमें चांदी की मात्रा सिर्फ 0.23 प्रतिशत पाई गई, जिससे यह साफ हो गया कि कर्मचारियों को दिए गए कई मेडल लगभग नकली थे।
मामला उजागर होने के बाद रेलवे ने संबंधित सप्लायर के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराई है और उसे ब्लैकलिस्ट करने की प्रक्रिया भी शुरू कर दी गई है। साथ ही, रेलवे के पास जो मेडल स्टॉक मौजूद है, उसका इस्तेमाल अब रिटायरमेंट उपहार के रूप में नहीं किया जाएगा, बल्कि उन्हें अन्य प्रशासनिक या वैकल्पिक उद्देश्यों के लिए प्रयोग किया जाएगा। रेलवे बोर्ड ने यह भी स्पष्ट किया है कि यह फैसला 31 जनवरी 2026 को रिटायर होने वाले कर्मचारियों पर भी लागू होगा। यानी इस तारीख से और उसके बाद सेवानिवृत्त होने वाले किसी भी अधिकारी या कर्मचारी को अब गोल्ड प्लेटेड सिल्वर मेडल नहीं मिलेगा। इस निर्णय को रेलवे व्यवस्था में पारदर्शिता और जवाबदेही बढ़ाने की दिशा में एक बड़ा कदम माना जा रहा है।









