दिल्ली पुलिस की साइबर सेल ने एक संगठित अंतरराज्यीय साइबर गिरोह का पर्दाफाश किया है, जो WhatsApp के जरिए फर्जी ‘ई-चालान’ भेजकर लोगों के मोबाइल फोन हैक करता और फिर उनके बैंक खातों से पैसे उड़ा लेता था. इस गिरोह के दो मुख्य आरोपियों को राजस्थान के श्रीगंगानगर जिले से गिरफ्तार किया गया है. जांच में सामने आया है कि आरोपी खुद को सरकारी एजेंसी जैसा दिखाने वाले मैसेज भेजते थे, जिनके साथ एक खतरनाक APK फाइल होती थी.
पुलिस के मुताबिक, जैसे ही कोई व्यक्ति उस फाइल को डाउनलोड करता, उसका फोन आरोपियों के कंट्रोल में चला जाता. इसके बाद बैंकिंग ऐप, ओटीपी और निजी जानकारियां चुरा ली जातीं और कुछ ही मिनटों में खाते खाली कर दिए जाते. एक मामले में पीड़ित के खाते से एक लाख रुपये से ज्यादा की रकम निकाल ली गई थी, जिसके बाद पुलिस हरकत में आई.
गिरोह की कार्यप्रणाली बेहद चालाक थी. वे सीधे बैंक खातों में पैसे जमा करने के बजाय पहले रकम को कई FASTag अकाउंट्स में ट्रांसफर करते, फिर उसे अलग-अलग ऑनलाइन प्लेटफॉर्म के गिफ्ट कार्ड में बदल देते थे. इस तरह डिजिटल लेन-देन की कई परतें बनाकर वे पैसों की असली राह छिपा देते थे.
राजस्थान के घड़साना इलाके में छापेमारी के दौरान पुलिस को एक फर्जी कंपनी की आड़ में चल रहा पूरा साइबर ठगी केंद्र मिला. वहां से दर्जनों मोबाइल फोन, लैपटॉप, सैकड़ों सिम कार्ड, कई एटीएम कार्ड, बैंक दस्तावेज, FASTag और एक POS मशीन बरामद की गई. शुरुआती जांच में पता चला है कि इस नेटवर्क के खिलाफ देशभर से कई शिकायतें दर्ज हैं.
पुलिस अब यह पता लगाने में जुटी है कि इस रैकेट से और कौन-कौन जुड़े हैं और अब तक कितनी बड़ी रकम की ठगी की जा चुकी है. साथ ही लोगों को सतर्क रहने की सलाह दी गई है कि अनजान लिंक या फाइल पर कभी क्लिक न करें, चाहे वह सरकारी मैसेज जैसा ही क्यों न लगे.









