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मनरेगा में बदलाव के खिलाफ नाभा में गरजे मजदूर, केंद्र सरकार पर आप का तीखा हमला

नाभा में आम आदमी पार्टी के कार्यकर्ताओं और मनरेगा से जुड़े मजदूरों ने केंद्र सरकार की नई व्यवस्था के खिलाफ प्रदर्शन किया. पार्टी का कहना है कि मनरेगा की फंडिंग में राज्यों पर अतिरिक्त जिम्मेदारी डालना न सिर्फ अव्यावहारिक है, बल्कि इससे गरीबों के लिए बनी इस योजना की बुनियाद ही कमजोर होती है. प्रदर्शनकारियों ने आरोप लगाया कि इस फैसले से मजदूरों के रोजगार और आय पर सीधा असर पड़ेगा।

प्रदर्शन के दौरान पंजाब के विधायक गुरदेव सिंह देव मान ने कहा कि केंद्र सरकार को योजना का नाम बदलने का अधिकार हो सकता है, लेकिन इसके उद्देश्य और ढांचे को इस तरह बदलना स्वीकार नहीं किया जा सकता. उनके मुताबिक हालिया बदलाव मनरेगा की मूल भावना के खिलाफ हैं और इससे सबसे ज्यादा नुकसान ग्रामीण मजदूरों और गरीब परिवारों को होगा. उन्होंने कहा कि जिन हाथों ने देश का निर्माण किया, आज उन्हीं हाथों से काम छीना जा रहा है।

देव मान ने पंजाब सरकार की ओर से मनरेगा के समर्थन में उठाए गए कदमों का जिक्र करते हुए कहा कि मुख्यमंत्री भगवंत मान के नेतृत्व में विधानसभा ने केंद्र से मांग की है कि योजना को उसके पुराने स्वरूप में लौटाया जाए. उन्होंने यह भी कहा कि आम आदमी पार्टी का शीर्ष नेतृत्व और कार्यकर्ता मजदूरों के साथ मजबूती से खड़े हैं।

इस मौके पर मौजूद पार्टी नेता अमरीक सिंह बांगड़ और एससी विंग के अध्यक्ष गुरप्रीत सिंह जीपी ने भी केंद्र की नीतियों की आलोचना की. गुरप्रीत सिंह ने कहा कि पार्टी पूरे पंजाब में आंदोलन तेज कर रही है और यह लड़ाई तब तक जारी रहेगी, जब तक मनरेगा से जुड़े फैसलों को वापस नहीं लिया जाता. उन्होंने आरोप लगाया कि नई व्यवस्थाओं का सबसे गहरा असर कामकाजी महिलाओं और आर्थिक रूप से कमजोर वर्गों पर पड़ रहा है. प्रदर्शनकारियों ने साफ शब्दों में कहा कि मनरेगा सिर्फ एक योजना नहीं, बल्कि करोड़ों परिवारों के लिए जीवन रेखा है. इसे कमजोर करने की किसी भी कोशिश के खिलाफ वे सड़कों पर आवाज उठाते रहेंगे।