नागपुर के प्रसिद्ध न्यूरोसर्जन डॉ. चंद्रशेखर पाखमोडे का 31 दिसंबर की सुबह 53 वर्ष की आयु में हार्ट अटैक से निधन हो गया। यह घटना इसलिए चौंकाने वाली मानी जा रही है क्योंकि उन्होंने कुछ दिन पहले ही ECG करवाया था और रिपोर्ट नॉर्मल आई थी। सुबह करीब 6 बजे अचानक गिरने के बाद उन्हें अस्पताल ले जाया गया, लेकिन उनकी जान नहीं बच सकी।
एक्सपर्ट बताते हैं कि हार्ट अटैक के कई साइलेंट खतरे होते हैं, जो शुगर, कोलेस्ट्रॉल और साधारण ECG जैसी जांचों में नहीं दिखते। सुबह 3 से 6 बजे के बीच हार्ट अटैक का खतरा बढ़ जाता है क्योंकि इस समय स्ट्रेस हार्मोन (एड्रेनालिन और कॉर्टिसोल) तेजी से बढ़ते हैं, ब्लड प्रेशर और दिल की धड़कन अधिक होती है, और खून में थक्के बनने का खतरा बढ़ जाता है।
बेंगलुरु के कार्डियोलॉजिस्ट डॉ. रंजन शेट्टी के अनुसार, लंबे समय तक तनाव, अधिक काम, नींद की कमी और बर्नआउट दिल की नसों को कमजोर कर देते हैं और उनमें फैट जमने का जोखिम बढ़ाते हैं। विशेषकर बाईं मुख्य धमनी (LAD) में ब्लॉकेज होने पर दिल के बड़े हिस्से को रक्त नहीं मिलता, जिससे अचानक हार्ट अटैक या कार्डियक अरेस्ट हो सकता है। ECG हमेशा पूरी तस्वीर नहीं दिखा पाती। ट्रोपोनिन जैसे खून के टेस्ट कुछ छिपी समस्याओं की पहचान में ज्यादा मददगार साबित होते हैं।









