नए साल की खुशियों के बीच देश भर में गिग वर्कर्स की हड़ताल ने डिलीवरी सेवाओं को प्रभावित कर दिया है। स्विगी, जोमैटो, अमेजन, फ्लिपकार्ट और अन्य ऑनलाइन प्लेटफॉर्म पर काम करने वाले डिलीवरी वर्कर्स ने अपने भुगतान में कमी और बढ़ते काम के घंटों के विरोध में हड़ताल शुरू कर दी है। वर्कर्स का कहना है कि हाल के महीनों में उनकी आमदनी आधी हो गई है और अब 7-8 घंटे काम करने के बावजूद उन्हें रोजाना केवल 400-500 रुपये ही मिल रहे हैं, जबकि पहले इतनी मेहनत पर 1,000 रुपये तक की आमदनी होती थी।
वर्कर्स ने बताया कि बढ़ते दबाव और कम समय में अधिक डिलीवरी करने की जिम्मेदारी ने उनके काम को मजबूरी बना दिया है। इसके अलावा, ट्रैफिक जाम या अन्य बाधाओं की वजह से उन्हें ग्राहकों का गुस्सा भी सहना पड़ता है। किसी हादसे की स्थिति में न तो इलाज की सुविधा है और न ही इंश्योरेंस। गिग वर्कर्स की मुख्य मांगें हैं: डिलीवरी दूरी और समय के आधार पर उचित पेमेंट, फेयर इंसेंटिव, स्वास्थ्य लाभ और बीमा पॉलिसी। हालांकि, असंगठित होने के कारण उनकी आवाज़ अक्सर सुनाई नहीं जाती। कंपनियों का कहना है कि नए पेमेंट मॉडल प्रदर्शन-आधारित हैं और डिलीवरी नेटवर्क को मजबूत करने के लिए बनाए गए हैं।
इस हड़ताल का असर रेस्टोरेंट्स और ग्राहकों पर भी पड़ा है। गुरुग्राम के कई फूड आउटलेट्स की ऑनलाइन बिक्री में 70-80% की गिरावट आई है। ग्राहकों को ऑर्डर समय पर नहीं मिल पा रहे हैं और दुकानदार भी अपनी बिक्री खो रहे हैं। देश में करीब 80 लाख गिग वर्कर्स हैं, जो डिलीवरी, लॉजिस्टिक्स और राइड-शेयरिंग सेक्टर में काम करते हैं। लचीले काम के बावजूद, सामाजिक सुरक्षा और न्यूनतम वेतन की कमी इस क्षेत्र की सबसे बड़ी चुनौती बनी हुई है। कुल मिलाकर, नए साल पर डिलीवरी में देरी की वजह से ग्राहकों और दुकानदारों दोनों को कठिनाई का सामना करना पड़ रहा है।









