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भारत की चौथी परमाणु पनडुब्बी S4 के समुद्री परीक्षण शुरू, नौसेना की शक्ति में होगा बड़ा इजाफा

भारत की चौथी परमाणु पनडुब्बी S4 ने समुद्री परीक्षण शुरू कर दिए हैं, जो देश की समुद्री ताकत और परमाणु जवाबी क्षमता को और मजबूत करेगी। यह पनडुब्बी 7,000 टन वजनी है, लगभग 80% स्वदेशी है और इसमें 8 K-4 बैलिस्टिक मिसाइलें तैनात की जा सकती हैं, जिनकी रेंज 3,500 किलोमीटर से अधिक है। S4 अरिहंत श्रेणी की अंतिम पनडुब्बी है और अब तक बनी सभी पनडुब्बियों में सबसे ज्यादा स्वदेशी सामग्री वाली मानी जा रही है, जिससे भारत परमाणु पनडुब्बी निर्माण में आत्मनिर्भर बन गया है।

पनडुब्बी के समुद्री परीक्षण 1–2 साल तक चलने की संभावना है, जिनमें रिएक्टर, इंजन, पानी के भीतर हथियार और सुरक्षा प्रणाली की क्षमता का परीक्षण किया जाएगा। यदि सभी परीक्षण सफल होते हैं, तो इसे 2027–28 तक भारतीय नौसेना में शामिल किया जाएगा। भारत के पास अब 4 एसएसबीएन हैं जिनमें से दो सेवा में हैं और दो परीक्षण के अधीन हैं। तीसरी पनडुब्बी आईएनएस अरिधमन 2026 के अंत में नौसेना में शामिल होने वाली है, जबकि S4 इसके एक साल बाद सेवा में आएगी। S4 के शामिल होने से भारत की समुद्री परमाणु ताकत और अधिक मजबूत होगी और देश की सुरक्षा को महत्वपूर्ण सहारा मिलेगा।