चीन सरकार से मिली अहम मंजूरी के बाद भारत के कंज्यूमर इलेक्ट्रॉनिक्स सेक्टर में एक बड़ी कारोबारी हलचल की तैयारी है। वैश्विक ब्रांड हायर की भारतीय इकाई में जल्द ही स्वामित्व संरचना बदलने जा रही है, जिससे बाजार में प्रतिस्पर्धा और निवेश के नए रास्ते खुल सकते हैं। रिपोर्ट्स के मुताबिक, हायर को अपनी भारतीय सब्सिडियरी हायर अप्लायंसेज इंडिया में 49 प्रतिशत हिस्सेदारी बेचने की अनुमति मिल गई है, जिसके बाद भारती एंटरप्राइजेज और प्राइवेट इक्विटी फर्म वारबर्ग पिंकस के संयुक्त निवेश का मार्ग साफ हो गया है।
प्रस्तावित लेनदेन के तहत हायर भारत में 49 प्रतिशत हिस्सेदारी अपने पास रखेगी, जबकि इतनी ही हिस्सेदारी भारती-वारबर्ग कंसोर्टियम के पास जाएगी। शेष 2 प्रतिशत शेयर कंपनी के कर्मचारियों को दिए जाएंगे। उद्योग सूत्रों का मानना है कि इस सौदे में हायर इंडिया का मूल्यांकन लगभग 1.3 से 1.5 अरब डॉलर के बीच हो सकता है, हालांकि अंतिम आंकड़े आधिकारिक घोषणा के साथ सामने आएंगे।
बताया जा रहा है कि अगले कुछ महीनों में सभी जरूरी स्थानीय और नियामकीय स्वीकृतियों की प्रक्रिया पूरी की जाएगी और इसके बाद डील को चरणबद्ध तरीके से अमल में लाया जाएगा। भारतीय साझेदारों की भागीदारी से हायर को उन नियामकीय अड़चनों से राहत मिलेगी, जो हाल के वर्षों में चीनी कंपनियों के लिए चुनौती बनी हुई थीं। खास तौर पर विदेशी निवेश से जुड़े नियमों के कारण कंपनी की विस्तार योजनाएं प्रभावित हो रही थीं।
हायर भारत में अपने कारोबार का तेजी से विस्तार कर रही है और फ्रिज, वॉशिंग मशीन, टीवी और एयर कंडीशनर जैसे उत्पादों में उसकी मौजूदगी लगातार मजबूत हुई है। हालिया वित्त वर्ष में कंपनी ने बिक्री और मुनाफे दोनों में उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की है और वह अब देश की प्रमुख कंज्यूमर इलेक्ट्रॉनिक्स कंपनियों में शामिल हो चुकी है। नए निवेश के साथ कंपनी मैन्युफैक्चरिंग क्षमता बढ़ाने, नेटवर्क विस्तार और ब्रांड मजबूती पर और ज्यादा फोकस कर सकेगी।









