भारत ने हरित ऊर्जा आधारित समुद्री तकनीक की दिशा में एक ऐतिहासिक कदम बढ़ाते हुए वाराणसी में देश का पहला पूर्णतः स्वदेशी हाइड्रोजन ईंधन से चलने वाला यात्री जलयान शुरू कर दिया है। पत्तन, पोत परिवहन और जलमार्ग मंत्री सर्बानंद सोनोवाल ने नमो घाट से इस अत्याधुनिक जलयान को वाणिज्यिक संचालन के लिए रवाना किया, जिससे देश में स्वच्छ और टिकाऊ जल परिवहन के नए युग की शुरुआत मानी जा रही है।
यह जलयान भारत में समुद्री परिवेश में हाइड्रोजन ईंधन सेल तकनीक का पहला प्रयोगात्मक और वाणिज्यिक रूप से संचालित मॉडल है। इसे कोचीन शिपयार्ड लिमिटेड ने भारतीय अंतर्देशीय जलमार्ग प्राधिकरण (IWAI) के लिए पूरी तरह स्वदेशी तकनीक से विकसित किया है। सोनोवाल के अनुसार, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में देश की परिवहन प्रणाली तेजी से हरित, आधुनिक और आत्मनिर्भर बन रही है। यह परियोजना ‘मेक इन इंडिया’ और पर्यावरण अनुकूल परिवहन को प्रोत्साहन देने वाली राष्ट्रीय नीति का उत्कृष्ट उदाहरण है। साथ ही, यह पहल गंगा नदी के संरक्षण और पुनर्जीवन के व्यापक अभियान को भी मजबूती प्रदान करती है।
सरकार के 2070 तक नेट-जीरो उत्सर्जन लक्ष्य के अनुरूप यह जलयान भारत के अंदरूनी जलमार्गों में स्वच्छ ईंधन के उपयोग को आगे बढ़ाने वाली एक महत्वपूर्ण उपलब्धि है। मेरीटाइम इंडिया विज़न 2030 और मेरीटाइम अमृत काल विज़न 2047 के तहत IWAI निरंतर उन्नत हरित तकनीकों को अपनाने की दिशा में काम कर रहा है। 24 मीटर लंबा यह कैटामरान शहरी परिवहन के लिए तैयार किया गया है। वातानुकूलित केबिन में 50 यात्रियों की क्षमता वाला यह जलयान हाइड्रोजन ईंधन सेल, बैटरी और सौर ऊर्जा के संयुक्त हाइब्रिड सिस्टम पर चलता है। एक बार हाइड्रोजन भरने पर यह आठ घंटे तक संचालन में रह सकता है और लगभग 6.5 समुद्री मील की गति प्राप्त करता है। सुरक्षा और दक्षता के सभी मानकों को पूरा करने पर इसे इंडियन रजिस्टर ऑफ शिपिंग से प्रमाणन मिला है।
इसके संचालन की निगरानी और तकनीकी देखरेख के लिए IWAI, CSL और इनलैंड एंड कोस्टल शिपिंग लिमिटेड के बीच त्रिपक्षीय समझौता किया गया है, जिसमें सुरक्षा प्रोटोकॉल, निरीक्षण व्यवस्था और संचालन संबंधी प्रावधान शामिल हैं। वाराणसी के लिए यह जलयान न केवल स्वच्छ और शांत यात्रा विकल्प उपलब्ध कराएगा, बल्कि जलमार्गों के उपयोग से सड़क यातायात का बोझ भी कम करेगा। साथ ही, पर्यावरण के अनुकूल इस तकनीक से शहर में पर्यटन और स्थानीय रोजगार के नए अवसर भी बढ़ने की उम्मीद है। हाइड्रोजन-संचालित यात्री परिवहन अपनाने वाले विश्व के शुरुआती शहरों में वाराणसी का नाम दर्ज होने जा रहा है। नमो घाट से ललिता घाट तक लगभग पांच किलोमीटर की पहली यात्रा में मंत्रियों, अधिकारियों और अन्य प्रतिनिधियों ने भाग लिया, जो भारत की समुद्री हरित तकनीक के भविष्य को दर्शाने वाला एक ऐतिहासिक क्षण साबित हुआ।









