कांग्रेस की पूर्व अध्यक्ष सोनिया गांधी के जन्मदिन के दिन ही दिल्ली की राउज एवेन्यू अदालत से एक नया नोटिस जारी हुआ, जिससे मतदाता सूची से जुड़े पुराने विवाद पर फिर से कानूनी गतिविधि तेज हो गई है। यह नोटिस अधिवक्ता विकास त्रिपाठी द्वारा दायर की गई एक रिवीजन याचिका पर सुनवाई के दौरान जारी किया गया, जिसमें दावा किया गया है कि सोनिया गांधी का नाम उस समय मतदाता सूची में शामिल था जब वे भारतीय नागरिक भी नहीं थीं।
याचिका में कहा गया है कि उपलब्ध दस्तावेजों में कई गंभीर विसंगतियाँ दिखाई देती हैं। वरिष्ठ अधिवक्ता पवन नारंग ने अदालत के सामने तर्क दिया कि रिकॉर्ड से प्रतीत होता है कि सोनिया गांधी के भारतीय नागरिक बनने से पहले ही उनका नाम वोटर लिस्ट में दर्ज कर दिया गया, जो न केवल चुनावी नियमों के विरुद्ध है बल्कि नागरिकता संबंधी मानकों पर भी सवाल उठाता है।
सेशंस जज विशाल गोगने ने इन शुरुआती दलीलों पर विचार करते हुए सोनिया गांधी और दिल्ली पुलिस दोनों को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है। राज्य पक्ष के अभियोजक ने नोटिस स्वीकार कर लिया है। अदालत ने ट्रायल कोर्ट रिकॉर्ड (TCR) भी पेश करने का आदेश दिया है ताकि मामले की सभी परिस्थितियों का विस्तृत मूल्यांकन किया जा सके।
यह रिवीजन उस आदेश को चुनौती देता है जिसमें मजिस्ट्रेट अदालत ने सोनिया गांधी के खिलाफ FIR दर्ज करने की मांग को अस्वीकार कर दिया था। याचिकाकर्ता का कहना है कि मजिस्ट्रेट का निर्णय अधूरी समझ पर आधारित था और इसलिए पुनर्विचार जरूरी है।
याचिका में यह भी आरोप है कि 1980 की मतदाता सूची में सोनिया गांधी का नाम दर्ज था, जबकि उन्होंने 1983 में भारतीय नागरिकता प्राप्त की। बाद में 1982 में उनका नाम मतदाता सूची से हटाया गया—यह तथ्य अपने आप में कई सवाल खड़ा करता है, जिनका उत्तर याचिकाकर्ता अदालत से मांग रहे हैं। अदालत अब 6 जनवरी को मामले की अगली सुनवाई करेगी, जब ट्रायल कोर्ट रिकॉर्ड उपलब्ध होने के बाद आगे की कार्रवाई पर निर्णय लिया जाएगा।









