हिमालय की चोटियाँ ठंड के मौसम में किसी जादुई संसार की तरह चमकने लगती हैं। बर्फ से ढकी ढलानें, सन्नाटे में लिपटे जंगल और सफेद धुंध में खोई घाटियाँ—सब कुछ किसी सपने जैसा लगता है। लेकिन इस खूबसूरत माहौल के पीछे छिपा एक कठोर सच है, जिसे हर यात्री को जानना जरूरी है। दिसंबर से फरवरी के बीच भारत की कई ऊंचाई पर बसे इलाके ऐसे मौसम का सामना करते हैं, जहाँ जाना तो दूर, वहाँ तक पहुँचने की कोशिश भी खतरनाक हो सकती है।
हिमाचल की स्पीति घाटी उन्हीं स्थानों में शामिल है। गर्मियों में जहाँ यह रोमांच प्रेमियों की पसंदीदा जगह बन जाती है, वहीं सर्दियों में यह महीनों तक दुनिया से कट जाती है। रोहतांग और कुंजुम जैसे पास भारी बर्फबारी के कारण सील कर दिए जाते हैं और तापमान –20°C के आसपास पहुँचकर यात्रा को लगभग असंभव बना देता है। लद्दाख की ज़ांस्कर घाटी का हाल भी इससे अलग नहीं है। लगातार गिरती बर्फ और जमती सड़कें यहाँ के प्रमुख रास्तों को ब्लॉक कर देती हैं। –25°C की ठंड, ब्लैक-आइस और हिमस्खलन का खतरा इस क्षेत्र को साधारण यात्रियों के लिए पूरी तरह बंद कर देता है।
मनाली का लोकप्रिय रोहतांग पास भी नवंबर के बाद बर्फीले तूफानों और खराब मौसम के कारण बंद रहता है। इसके अतिरिक्त खारदुंग ला जैसी ऊँचाई वाली जगहें तेज़ हवाओं, कम ऑक्सीजन और बर्फ से ढके रास्तों के चलते हफ्तों तक बंद रह सकती हैं। सिक्किम की युमथांग वैली, जो गर्मियों में फूलों की महक से भर जाती है, सर्दियों में –15°C तापमान और लगातार होने वाले भूस्खलन के कारण बेहद चुनौतीपूर्ण क्षेत्र बन जाती है।
ऐसे में यदि आप विंटर ट्रैवल की योजना बना रहे हैं, तो इन क्षेत्रों को गर्मियों तक के लिए छोड़ देना ही बेहतर है। ये स्थान देखने लायक जरूर हैं, लेकिन सही मौसम का इंतजार आपकी यात्रा को सुरक्षित और यादगार बनाएगा।









