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नए लेबर कोड के खिलाफ देशभर में विरोध, यूनियनों ने जताई नाराज़गी

देश की दस प्रमुख ट्रेड यूनियनों ने केंद्र सरकार द्वारा लागू किए गए चार नए लेबर कोड को मजदूर हितों के खिलाफ बताते हुए तत्काल वापस लेने की मांग उठाई है। यूनियनों ने घोषणा की है कि वे बुधवार को पूरे देश में विरोध प्रदर्शन करेंगी। ये सभी संगठन, जिनमें से अधिकतर विपक्षी दलों से जुड़े हैं, पिछले कई वर्षों से इन श्रम कानूनों का पुरज़ोर विरोध कर रहे हैं।

पांच साल पहले संसद से पारित किए गए इन लेबर कोड्स को सरकार पुराने और जटिल श्रम कानूनों की जगह एक सरल व्यवस्था बताती है। सरकार का दावा है कि नए प्रावधान मजदूरों को न्यूनतम वेतन, सामाजिक सुरक्षा और बेहतर कामकाजी वातावरण जैसे लाभ सुनिश्चित करेंगे और उद्योगों में निवेश को भी बढ़ावा मिलेगा। हालांकि, ट्रेड यूनियनों का आरोप है कि इन कानूनों से कंपनियों को कर्मचारियों की छंटनी करने में अधिक छूट मिलती है, जिससे श्रमिकों की सुरक्षा कमजोर पड़ती है।

नई व्यवस्था के तहत फैक्ट्रियों में शिफ्ट की अवधि बढ़ाई जा सकती है, महिलाओं को रात्रि पाली में काम की अनुमति दी गई है और छंटनी के लिए सरकारी अनुमति की सीमा 100 कर्मचारियों से बढ़ाकर 300 कर दी गई है। उद्योग जगत का एक हिस्सा इन बदलावों को सकारात्मक मानता है और कहता है कि पुराने कानून उत्पादन क्षमता बढ़ाने में बाधा थे। बावजूद इसके, छोटे व मझोले उद्यमों ने चेतावनी दी है कि नए कोड उनके खर्च और संचालन को प्रभावित कर सकते हैं।

भारतीय मजदूर संघ (BMS) ने इन कोड्स का समर्थन करते हुए कहा है कि राज्यों को बातचीत के बाद जल्द नियम लागू करने चाहिए। श्रम मंत्रालय यूनियनों से चर्चा कर चुका है, लेकिन सहमति बनना अभी भी मुश्किल दिख रहा है। देश के सभी राज्यों को वेतन, औद्योगिक संबंध, सामाजिक सुरक्षा और व्यावसायिक सुरक्षा से जुड़े इन चार कोड्स के लिए अपने-अपने नियम तैयार करने होंगे।