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भारत का ब्रह्मपुत्र मिशन: चीन को जवाब देने के लिए 6.4 ट्रिलियन की जलविद्युत योजना तैयार

भारत ने चीन की सीमा के पास बन रहे विशाल बांधों का जवाब देने के लिए बड़ा कदम उठाया है. केंद्रीय विद्युत प्राधिकरण (CEA) ने सोमवार को बताया कि भारत सरकार ने ब्रह्मपुत्र नदी बेसिन में जलविद्युत परियोजनाओं को तेज़ी से विकसित करने की योजना बनाई है. इस परियोजना के तहत 2047 तक लगभग 76 गीगावाट जलविद्युत क्षमता विकसित की जाएगी, जिस पर करीब 6.4 ट्रिलियन रुपये का खर्च आएगा.

यह योजना ऐसे समय में सामने आई है जब चीन तिब्बत में ब्रह्मपुत्र के ऊपरी हिस्से पर एक बड़ी जलविद्युत परियोजना पर काम कर रहा है, जिससे भारत की जल सुरक्षा और रणनीतिक संतुलन पर सवाल उठ रहे हैं. चीन की इस परियोजना से भारत को आशंका है कि युद्ध या तनाव की स्थिति में जल को एक हथियार के रूप में इस्तेमाल किया जा सकता है.

CEA की रिपोर्ट के मुताबिक, प्रस्तावित परियोजनाएं पूर्वोत्तर भारत के 12 उप-बेसिनों में फैली होंगी. इनमें 208 बड़ी जलविद्युत परियोजनाएं शामिल हैं जिनसे 64.9 GW की क्षमता और 11.1 GW की पंप स्टोरेज क्षमता प्राप्त होगी. अरुणाचल प्रदेश अकेले इस योजना में 52.2% की भागीदारी रखता है.

योजना का पहला चरण 2035 तक पूरा किया जाएगा, जिस पर 1.91 ट्रिलियन रुपये खर्च होंगे, जबकि दूसरा चरण 2047 तक 4.52 ट्रिलियन रुपये में पूरा होगा. इसमें NHPC, NEEPCO और SJVN जैसी कंपनियों की भागीदारी होगी. यह पहल भारत की ऊर्जा सुरक्षा को मजबूत करने, पूर्वोत्तर राज्यों के विकास को गति देने और चीन की गतिविधियों का रणनीतिक जवाब देने की दिशा में एक अहम कदम है.