जॉर्जिया इन दिनों गंभीर राजनीतिक संकट से गुजर रहा है. राजधानी त्बिलिसी की सड़कों पर हजारों लोग सरकार के खिलाफ प्रदर्शन कर रहे हैं. फ्रीडम स्क्वायर से राष्ट्रपति भवन तक जनसैलाब उमड़ पड़ा है. हालात इतने बिगड़ चुके हैं कि पुलिस को वाटर कैनन, पेपर स्प्रे और आंसू गैस का इस्तेमाल करना पड़ा, लेकिन प्रदर्शन थमे नहीं हैं.
प्रदर्शन की जड़ यूरोपियन इंटीग्रेशन से जुड़ी है. विपक्षी दलों का आरोप है कि सत्तारूढ़ पार्टी ‘जॉर्जियन ड्रीम’ रूस के एजेंडे को आगे बढ़ा रही है और देश को यूरोपियन यूनियन से दूर कर रही है. जनता की मांग है कि राजनीतिक कैदियों को रिहा किया जाए और सरकार अपने फैसलों पर पुनर्विचार करे.
यह विरोध अचानक नहीं हुआ है. पिछले चुनावों में धांधली के आरोपों के बाद 300 दिनों से छोटे-बड़े प्रदर्शन चल रहे थे, जो अब हिंसक रूप ले चुके हैं. राष्ट्रपति भवन तक कब्जा, झड़पें, आगजनी और प्रशासनिक नियंत्रण टूटने की खबरें इस संकट की गंभीरता को दर्शाती हैं.
यह संकट सिर्फ घरेलू राजनीति नहीं, बल्कि रूस बनाम पश्चिम की बड़ी लड़ाई की झलक भी है. प्रदर्शनकारियों ने कई जगह रशियन झंडे जलाए, जिससे साफ है कि यह विरोध रूस समर्थक नीतियों के खिलाफ है. विशेषज्ञों के अनुसार, यह आंदोलन सत्ता परिवर्तन की ओर बढ़ सकता है. फिलहाल देश अराजकता की चपेट में है.









