वित्त वर्ष 2025-26 की तीसरी तिमाही (अक्टूबर-दिसंबर) के जीडीपी आंकड़ों ने भारतीय अर्थव्यवस्था की मजबूती को फिर साबित किया है। इस अवधि में विकास दर 7.8% दर्ज की गई, जो नई सीरीज के आधार पर मापी गई है। बाजार विशेषज्ञों और ब्लूमबर्ग ने करीब 7.6% ग्रोथ का अनुमान जताया था, जिसे भारत ने पार कर लिया। हालांकि यह पिछली तिमाही के 8.2% से थोड़ा कम है, फिर भी वैश्विक अनिश्चितताओं और अमेरिकी टैरिफ जैसे बाहरी दबावों के बीच यह प्रदर्शन मजबूत माना जा रहा है।
क्षेत्रवार प्रदर्शन पर नजर डालें तो कृषि क्षेत्र में 1.4% की वृद्धि हुई, जबकि माइनिंग सेक्टर 4.7% की दर से बढ़ा। वित्त और रियल एस्टेट में 11.2% की सालाना वृद्धि दर्ज की गई। रक्षा क्षेत्र में 4.5% और कंस्ट्रक्शन सेक्टर में 6.6% की ग्रोथ देखने को मिली। इस मजबूत प्रदर्शन के पीछे मैन्युफैक्चरिंग गतिविधियों में तेजी, त्योहारों के दौरान बढ़ी खपत और घरेलू मांग में सुधार अहम कारण रहे। सरकार द्वारा बुनियादी ढांचे पर बढ़ाया गया खर्च भी अर्थव्यवस्था को सहारा दे रहा है। हालांकि भविष्य में कच्चे तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव और वैश्विक नीतिगत बदलाव चुनौतियां पैदा कर सकते हैं। बेस ईयर में बदलाव का उद्देश्य नए डेटा स्रोतों को शामिल करना और अनुमान पद्धति को अधिक सटीक बनाना है, जिससे आर्थिक तस्वीर और स्पष्ट हो सके।









