हरियाणा में IDFC First Bank से जुड़े 590 करोड़ रुपये के कथित वित्तीय घोटाले ने सियासी तूल पकड़ लिया है। विपक्ष के सवालों के बीच राज्य सरकार ने तत्काल कार्रवाई करते हुए चार सदस्यीय उच्च स्तरीय जांच समिति का गठन किया है। सरकार द्वारा गठित इस कमेटी की अध्यक्षता वित्त विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव अरुण गुप्ता करेंगे। समिति में तीन अन्य वरिष्ठ अधिकारी शामिल हैं, जो बैंकिंग नीतियों, प्रक्रियाओं और संभावित अनियमितताओं की गहराई से जांच करेंगे। जांच रिपोर्ट एक महीने के भीतर सरकार को सौंपने के निर्देश दिए गए हैं।
मुख्यमंत्री नायब सैनी ने विधानसभा के बजट सत्र के दौरान बताया कि 590 करोड़ रुपये में से 556 करोड़ रुपये की राशि 24 घंटे के भीतर रिकवर कर ली गई है। यह रकम अन्य बैंकों में राज्य सरकार के खातों में ट्रांसफर कर दी गई है। शेष राशि की वसूली की प्रक्रिया जारी है। सरकार का कहना है कि जांच हर पहलू से की जाएगी—ताकि यह स्पष्ट हो सके कि इस गबन में केवल बैंक कर्मियों की भूमिका थी या फिर राज्य सरकार के किसी विभाग के अधिकारी या कर्मचारी की भी संलिप्तता रही है। इस मामले ने राज्य की बैंकिंग प्रक्रियाओं और वित्तीय निगरानी तंत्र पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं। अब निगाहें जांच समिति की रिपोर्ट पर टिकी हैं, जो पूरे घटनाक्रम की परतें खोल सकती है।









