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25 हजार करोड़ MSC बैंक घोटाला: दिवंगत अजित पवार और सुनेत्रा पवार को मिली क्लीन चिट

मुंबई की एक विशेष अदालत ने महाराष्ट्र स्टेट को-ऑपरेटिव बैंक से जुड़े कथित घोटाले के लंबे समय से चल रहे मामले में बड़ा फैसला सुनाया है। इस मामले में आर्थिक अपराध शाखा (EOW) द्वारा दाखिल की गई क्लोजर रिपोर्ट को स्वीकार करते हुए अदालत ने कई नेताओं और पूर्व बैंक अधिकारियों को राहत दे दी है। जांच में पाया गया कि वित्तीय लेनदेन में कुछ अनियमितताएं जरूर सामने आई थीं, लेकिन उन्हें आपराधिक साजिश साबित करने के लिए पर्याप्त सबूत नहीं मिले।

इस मामले में करीब 25,000 करोड़ रुपये के घोटाले के आरोप लगाए गए थे। जांच के दौरान सामने आया कि बैंक से दिए गए लोन और कुछ संपत्तियों, खासकर चीनी मिलों की बिक्री में गड़बड़ियों की शिकायतें थीं। हालांकि जांच एजेंसियों ने स्पष्ट किया कि किसी भी तरह से बैंक को जानबूझकर नुकसान पहुंचाने के ठोस प्रमाण नहीं मिले। साथ ही यह भी पाया गया कि बैंक ने रिकवरी प्रक्रिया के जरिए लगभग 1,343 करोड़ रुपये की वसूली कर ली थी।

अदालत के इस फैसले से लगभग 75 आरोपियों को राहत मिली है, जिनमें कई पूर्व बैंक निदेशक और राजनीतिक हस्तियां भी शामिल हैं। एक सामाजिक कार्यकर्ता की ओर से दायर याचिका को भी अदालत ने खारिज कर दिया। जांच एजेंसी ने अपनी रिपोर्ट में कहा कि पर्याप्त सबूत न मिलने के कारण चार्जशीट दाखिल करने का कोई आधार नहीं बनता।

इस निर्णय के साथ ही ट्रायल कोर्ट स्तर पर यह हाई-प्रोफाइल मामला समाप्त हो गया है, हालांकि अदालत के विस्तृत आदेश का अभी इंतजार किया जा रहा है। इस फैसले को राजनीतिक और कानूनी हलकों में महत्वपूर्ण माना जा रहा है क्योंकि यह लंबे समय से चर्चा में रहे इस मामले से जुड़े आरोपों पर एक बड़ा कानूनी निष्कर्ष है। विशेषज्ञों का मानना है कि यह फैसला जांच प्रक्रिया और साक्ष्य आधारित कानूनी कार्यवाही की अहमियत को भी दर्शाता है।