राज्यसभा एक स्थायी सदन होने के कारण यहां लंबित विधेयक लोकसभा की तरह खत्म नहीं होते। इसी वजह से मौजूदा समय में राज्यसभा में कुल 19 बिल अब भी पेंडिंग पड़े हैं। एक संसदीय बुलेटिन के मुताबिक, इन लंबित विधेयकों में सबसे पुराना संविधान (79वां संशोधन) विधेयक, 1992 है। 1992 में पेश किए गए इस विधेयक का उद्देश्य राज्य नीति के निदेशक सिद्धांतों में संशोधन कर जनसंख्या नियंत्रण और छोटे परिवार के नियम को बढ़ावा देना था। इसमें छोटे परिवार के नियम को मौलिक कर्तव्यों में शामिल करने और दो से अधिक बच्चे होने पर सांसदों-विधायकों को अयोग्य घोषित करने का प्रस्ताव भी था।
लंबित विधेयकों में दिल्ली किराया (संशोधन) विधेयक, 1997 भी शामिल है, जिसका मकसद दिल्ली किराया कानून को आधुनिक बनाना था। इसी तरह बीज विधेयक, 2004 भी राज्यसभा में लंबित है, जो बीजों की गुणवत्ता को नियंत्रित करने और बेहतर बीजों के उत्पादन व आपूर्ति को बढ़ावा देने के लिए लाया गया था। इसके अलावा, अंतर-राज्य प्रवासी कामगार (रोजगार और सेवा शर्तों का विनियमन) संशोधन विधेयक, 2011 भी अब तक पारित नहीं हो सका है।
यूपीए-2 सरकार के दौरान पेश किए गए कई अन्य विधेयक भी लंबित हैं, जिनमें बिल्डिंग एंड अदर कंस्ट्रक्शन वर्कर्स रिलेटेड लॉज़ (संशोधन) विधेयक, 2013, एम्प्लॉयमेंट एक्सचेंजेस संशोधन विधेयक, 2013 और अनुसूचित जाति-जनजाति प्रतिनिधित्व से जुड़े विधेयक शामिल हैं। वहीं, एनडीए सरकार के कार्यकाल में पेश किए गए लंबित विधेयकों में संविधान (125वां संशोधन) विधेयक, 2019 प्रमुख है, जिसका उद्देश्य पूर्वोत्तर राज्यों में स्वायत्त परिषदों को अधिक वित्तीय और प्रशासनिक शक्तियां देना है। इसके साथ ही गैर-निवासी भारतीयों के विवाह पंजीकरण से जुड़ा विधेयक, 2019 भी अब तक राज्यसभा में लंबित है।









