हरियाणा सरकार ने संपत्तियों की रजिस्ट्री को पेपरलेस बनाकर पारदर्शिता बढ़ाने और भ्रष्टाचार पर लगाम लगाने की दिशा में कदम तो बढ़ाया है, लेकिन ‘ऑटो-म्यूटेशन’ (स्वतः इंतकाल) व्यवस्था अभी पूरी तरह जमीन पर नहीं उतर पाई है। ताजा आंकड़ों के अनुसार प्रदेश में करीब 1.45 लाख म्यूटेशन (इंतकाल) के मामले लंबित हैं। अधिकारियों का कहना है कि देरी तकनीकी खामी के कारण नहीं, बल्कि पटवारी, कानूनगो और तहसील स्तर पर प्रक्रियात्मक सुस्ती के चलते हो रही है।
स्थिति को गंभीरता से लेते हुए सरकार ने सभी जिलों के उपायुक्तों (DC) को लंबित मामलों का शीघ्र निपटारा करने के निर्देश दिए हैं। इसके लिए लगभग डेढ़ महीने की समय-सीमा तय की गई है, ताकि भविष्य में ऑटो-म्यूटेशन प्रणाली को सुचारु रूप से लागू किया जा सके। राजस्व एवं आपदा प्रबंधन विभाग के अनुसार प्रदेश के 22 जिलों में 143 तहसील-उप तहसील और 7104 गांव आते हैं। इनमें से करीब 80,182 मामलों में अब तक ऑनलाइन प्रविष्टि दर्ज ही नहीं हो सकी है, जबकि लगभग 65,221 मामले पटवारी और कानूनगो स्तर पर स्वीकृति के इंतजार में अटके हुए हैं।
अधिकारियों के अनुसार Haryana Revenue and Disaster Management Department द्वारा पेपरलेस रजिस्ट्री पोर्टल को अपग्रेड करने की तैयारी की जा रही है। विभाग के निदेशक डॉ. यशपाल ने संकेत दिए हैं कि अगले एक से डेढ़ महीने में ऐसा सिस्टम तैयार किया जाएगा, जिसमें रजिस्ट्री होते ही इंतकाल स्वतः दर्ज हो जाएगा। अपग्रेडेशन के बाद नागरिकों को दफ्तरों के चक्कर नहीं लगाने पड़ेंगे और पूरी प्रक्रिया ऑनलाइन एवं पारदर्शी तरीके से पूरी की जा सकेगी।









